- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Chhath Puja में पीतल...
धर्म-अध्यात्म
Chhath Puja में पीतल के बर्तनों का क्यों होता है विशेष महत्व? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
Harrison
17 Oct 2025 7:41 PM IST

x
Religion Spirituality ,धर्म अध्यात्म: छठ पूजा, सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक पवित्र और आस्था से परिपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में बड़े श्रद्धा-भाव से मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और इसकी विशेष पूजा सूर्य उदय और सूर्यास्त के समय की जाती है।
इस महापर्व में व्रत रखने वाले श्रद्धालु (व्रती) कठोर नियमों का पालन करते हैं और सात्विकता, शुद्धता और पवित्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में पीतल के बर्तनों का प्रयोग न केवल परंपरा का हिस्सा है, बल्कि इसका धार्मिक, आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक महत्व भी है।
शास्त्रों में पीतल का महत्व
पीतल (Brass) एक मिश्रित धातु है, जो तांबे (कॉपर) और जिंक से मिलकर बनती है। आयुर्वेद और धर्मशास्त्रों में पीतल को पवित्र धातु माना गया है।
धार्मिक दृष्टि से, पीतल का उपयोग पूजा में इसलिए किया जाता है क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है।
आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार, पीतल के बर्तनों में रखा गया जल या भोजन शरीर के लिए लाभकारी होता है। यह शरीर के तीन दोषों – वात, पित्त और कफ – को संतुलित करता है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी पीतल बृहस्पति ग्रह से जुड़ा हुआ है, जो ज्ञान, समृद्धि और धर्म का प्रतीक है। छठ पूजा में सूर्य और बृहस्पति दोनों की पूजा होती है, इसलिए पीतल का महत्व और बढ़ जाता है।
छठ पूजा और पीतल के बर्तन का संबंध
छठ पूजा के दौरान व्रती सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए सूप, लोटा, थाली, कलश और अन्य पूजा सामग्री के लिए प्रायः पीतल के बर्तनों का ही उपयोग करते हैं। इसके पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं:
✔️ 1. पवित्रता का प्रतीक
पीतल को अत्यंत शुद्ध धातु माना जाता है। छठ पूजा में व्रती पूरी पवित्रता और सात्विकता के साथ पूजा करते हैं, इसलिए पीतल के बर्तन प्रयोग में लाना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
✔️ 2. सौर ऊर्जा को आकर्षित करना
पीतल की धातु सूर्य की किरणों को आकर्षित करने और उसे संरक्षित करने में सक्षम होती है। छठ पूजा सूर्य देव को समर्पित है, इसलिए पीतल के बर्तनों में अर्घ्य देना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से उचित है।
✔️ 3. प्राकृतिक शुद्धता
पीतल के बर्तनों में रखे फल, जल या अन्य पूजन सामग्री लंबे समय तक शुद्ध और ताजगी से भरपूर रहते हैं। यह रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत स्थिर धातु है।
✔️ 4. परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव
पीढ़ियों से छठ पूजा में पीतल के बर्तनों का प्रयोग होता आया है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपरा का एक हिस्सा है जिसे अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
छठ पूजा में प्रयोग होने वाले पीतल के प्रमुख बर्तन
सूप (छालीनुमा बर्तन) – प्रसाद रखने के लिए
लोटा – जल भरने और अर्घ्य अर्पण के लिए
थाली – फल, ठेकुआ और अन्य पूजन सामग्री के लिए
कलश – पूजा में कलश स्थापना के लिए
छलनी – सूर्य दर्शन के समय उपयोग के लिए
इन सभी बर्तनों को श्रद्धा और भक्ति के साथ उपयोग में लाया जाता है और पूजा के बाद इन्हें संभालकर रखा जाता है ताकि अगली बार फिर प्रयोग हो सके।
पीतल के बर्तन छठ पूजा का अभिन्न हिस्सा हैं, जिनका प्रयोग केवल धार्मिक आस्था के लिए नहीं, बल्कि पवित्रता, स्वास्थ्य और सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इन बर्तनों में किया गया अर्घ्य और भोग सूर्य देव को प्रसन्न करता है और व्रती को आयु, स्वास्थ्य, संतान सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
आज के आधुनिक युग में भी, जब तमाम विकल्प मौजूद हैं, तब भी श्रद्धालु परंपरा और शास्त्रीय मान्यता को प्राथमिकता देते हुए पीतल के बर्तनों को छठ पूजा में शामिल करते हैं, जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और आध्यात्मिकता की गहराई को दर्शाता है।
Tagsछठ पूजापीतल बर्तनोंधार्मिकवैज्ञानिकChhath PujaBrass UtensilsReligiousScientificजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newsSamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





