धर्म-अध्यात्म

नवरात्र में मां दुर्गा को क्यों चढ़ाई जाती है लौंग, जानें आध्यात्मिक महत्व

nidhi
1 Oct 2026 10:31 AM IST
नवरात्र में मां दुर्गा को क्यों चढ़ाई जाती है लौंग, जानें आध्यात्मिक महत्व
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माता दुर्गा को लौंग अर्पित करने की परंपरा
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के दौरान कई विशेष सामग्री अर्पित की जाती हैं। इनमें लौंग का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लौंग की सुगंध और उसकी तीक्ष्ण प्रकृति को शुद्धता, सकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
नवरात्र में देवी दुर्गा को लौंग अर्पित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। पूजा-पाठ और हवन में भी लौंग का इस्तेमाल किया जाता है। मान्यता है कि इसकी सुगंध वातावरण को पवित्र करने में सहायक होती है और पूजा के दौरान मन को एकाग्र रखने में मदद करती है।
देवी उपासना में लौंग को शक्ति और ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है। भक्त मां दुर्गा को लौंग अर्पित कर जीवन की परेशानियों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर माता को दो लौंग अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा में लौंग चढ़ाते समय मन शुद्ध होना चाहिए और श्रद्धा के साथ माता का स्मरण करना चाहिए। केवल किसी सामग्री को अर्पित करने की बजाय भक्ति और सकारात्मक भावना को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
नवरात्र के दौरान हवन में लौंग डालने की परंपरा भी देखने को मिलती है। माना जाता है कि लौंग की सुगंध वातावरण में फैलने से पूजा स्थल का माहौल सात्विक बनता है। हालांकि इन बातों का आधार मुख्य रूप से धार्मिक परंपराएं और लोकमान्यताएं हैं।
माता दुर्गा की पूजा में लौंग के साथ फूल, फल, नारियल, चुनरी और प्रसाद भी अर्पित किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है।
नवरात्र का मुख्य संदेश शक्ति, संयम, भक्ति और आत्मविश्वास से जुड़ा है। ऐसे में लौंग चढ़ाने की परंपरा को भी देवी के प्रति श्रद्धा और शुद्ध भाव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
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