धर्म-अध्यात्म

माला में क्यों होते हैं 108 मनके, जानिए क्या है इसके पीछे की मान्यता और प्रचलित

Tulsi Rao
15 Dec 2021 9:10 AM GMT
माला में क्यों होते हैं 108 मनके, जानिए क्या है इसके पीछे की मान्यता और प्रचलित
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हिंदू धर्म में राम के नाम को मोक्षदायी माना गया है. इसलिए लोग सुबह उठकर एक दूसरे से राम-राम बोलते हैं, किसी से मिलने पर राम-राम बोलकर अभिवादन करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। हिंदू धर्म में राम के नाम को मोक्षदायी माना गया है. इसलिए लोग सुबह उठकर एक दूसरे से राम-राम बोलते हैं, किसी से मिलने पर राम-राम बोलकर अभिवादन करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अभिवादन करते समय राम के नाम को दो बार क्यों बोला जाता है? सिर्फ राम बोलने से भी तो अभिवादन किया जा सकता है, फिर राम-राम ही क्यों बोला जाता है?

दरअसल दो बार राम-राम बोलने के पीछे एक गूढ़ रहस्य छिपा है. इसीलिए राम-राम कहने की प्रथा पुराने समय से चली आ रही है, आज भी विद्यमान है और आगे भी इसे ऐसे ही दोहराया जाएगा. यहां जानिए राम-राम को एक साथ कहने की वजह.
राम-राम से मिलता है एक माला जाप का पुण्य
जब भी हम किसी मंत्र का माला से जाप करते हैं, तो 108 बार करते हैं क्योंकि एक माला में 108 मनके होते हैं. 108 की संख्या को बेहद शुभ माना गया है. आपको जानकर हैरानी होगी कि राम-राम कह देने भर से 108 का योग बन जाता है. यानी राम-राम साथ बोलना ही एक माला के समान माना गया है. दरअसल अगर आप हिंदी की शब्दावली पर गौर करें तो 'र' सत्ताइसवां शब्द है, 'आ' की मात्रा दूसरा और 'म' पच्चीसवां शब्द है. अब अगर इन तीनों का योग किया जाए तो 27 + 2 + 25 = 54 हुआ. 54 + 54 = 108 हुआ. इस तरह राम-राम कहने से 108 का योग बन जाता है. इसका तात्पर्य है कि राम-राम कहने से एक माला जाप के समान पुण्य की प्राप्ति होती है.
जानें माला में 108 मनके ही क्यों होते हैं
पौराणिक मान्यता के अनुसार नक्षत्रों की कुल संख्या 27 होती है. हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं. इस तरह अगर हम 27 का गुणा 4 तो योग 108 आएगा. माना जाता है कि इस गणना के साथ ही ऋषि मुनियों ने 108 मनकों की माला का विधान तैयार किया. इस तरह माला का एक एक दाना नक्षत्र के एक एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है.
108 मनकों को लेकर ये मान्यता भी प्रचलित
माला के 108 मनकों को लेकर एक अन्य मान्यता भी प्रचलित है. इस मान्यतानुसार मनकों का संबन्ध सूर्य की कलाओं से होता है. एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है और वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है. छह माह सूर्य उत्तरायण रहता है और छह माह दक्षिणायन. छह माह की एक स्थिति में 108000 बार कलाएं बदलता है. कहा जाता है 108000 में से पीछे के शून्यों को हटाकर 108 मनके की संख्या तय की गई है. इस तरह देखा जाए तो माला का हर मनका सूर्य की अलग अलग कला का प्रतीक है.


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