धर्म-अध्यात्म

आखिर कौन होती हैं कुमारी देवी? जानिए नेपाल की खास पूजा परंपरा

nidhi
25 Sept 2026 4:26 PM IST
आखिर कौन होती हैं कुमारी देवी? जानिए नेपाल की खास पूजा परंपरा
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अनोखी कुमारी परंपरा छोटी बच्चियों की देवी
नेपाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में ‘कुमारी पूजा’ का विशेष महत्व है। इस प्रथा में चयनित छोटी लड़की को जीवित देवी यानी ‘कुमारी’ के रूप में पूजा जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से काठमांडू घाटी के नेवार समुदाय में प्रचलित है और हिंदू तथा बौद्ध परंपराओं का अनूठा संगम मानी जाती है।
‘कुमारी’ शब्द संस्कृत से आया है, जिसका अर्थ अविवाहित कन्या होता है। नेपाल में कुमारी को देवी तलेजु का जीवित स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि देवी की दिव्य शक्ति एक चयनित कन्या में निवास करती है। यही कारण है कि श्रद्धालु कुमारी के दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना शुभ मानते हैं।
कैसे होता है कुमारी का चयन?
कुमारी बनने वाली बच्ची का चयन एक निर्धारित धार्मिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। परंपरागत रूप से काठमांडू की राज कुमारी का चयन नेवार समुदाय के शाक्य परिवारों की छोटी लड़कियों में से किया जाता है। चयन के दौरान बच्ची की आयु, स्वास्थ्य और कुछ पारंपरिक शारीरिक विशेषताओं सहित कई धार्मिक मानदंडों को देखा जाता है।
चयन के बाद धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और बच्ची को कुमारी के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है। इसके बाद वह विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं को दर्शन देती है।
छोटी बच्ची को ही देवी क्यों माना जाता है?
इस परंपरा के पीछे कन्या को पवित्रता और देवी शक्ति का प्रतीक मानने की धार्मिक अवधारणा जुड़ी हुई है। कुमारी को देवी तलेजु की जीवित अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है। मान्यता के अनुसार जब तक चयनित लड़की बाल्यावस्था में रहती है और परंपरा के निर्धारित मानदंड पूरे करती है, तब तक उसमें देवी की शक्ति का वास माना जाता है।
कुमारी के किशोरावस्था में पहुंचने के बाद आमतौर पर उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है और नई कुमारी का चयन किया जाता है। इसके बाद पूर्व कुमारी सामान्य जीवन में लौटती हैं।
कुमारी घर में रहती हैं जीवित देवी
काठमांडू की प्रसिद्ध राज कुमारी ‘कुमारी घर’ में रहती हैं। यह ऐतिहासिक भवन काठमांडू दरबार स्क्वायर के पास स्थित है। यहां बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालुओं के साथ विदेशी पर्यटक भी कुमारी की एक झलक पाने पहुंचते हैं।
विशेष धार्मिक अवसरों पर कुमारी को पारंपरिक लाल वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं। उनके माथे पर विशेष श्रृंगार किया जाता है। बड़े उत्सवों में उन्हें रथ पर बैठाकर नगर में यात्रा भी कराई जाती है।
इंद्र जात्रा में खास महत्व
नेपाल के प्रसिद्ध इंद्र जात्रा उत्सव के दौरान कुमारी की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। काठमांडू में आयोजित होने वाले इस उत्सव में जीवित देवी की रथ यात्रा प्रमुख आकर्षण होती है। हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं।
नेपाल में राजशाही समाप्त होने के बाद भी कुमारी परंपरा जारी है। इससे पता चलता है कि यह प्रथा केवल राजपरिवार से जुड़ी परंपरा नहीं, बल्कि नेपाल की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
हालांकि आधुनिक समय में कुमारी प्रथा को लेकर बच्चों की शिक्षा, स्वतंत्रता और सामान्य जीवन से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं। समय के साथ पूर्व कुमारी की शिक्षा और सामान्य जीवन में वापसी जैसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया गया है।
सदियों पुरानी कुमारी परंपरा आज भी नेपाल की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। छोटी बच्ची को जीवित देवी मानकर पूजा करने की यह परंपरा हिंदू और बौद्ध मान्यताओं के ऐतिहासिक मेल को भी दर्शाती है।
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