धर्म-अध्यात्म

मंगलवार के व्रत में किस देवता की होती है पूजा, शास्त्रों में जानें महत्व

Tara Tandi
26 Aug 2025 6:23 PM IST
मंगलवार के व्रत में किस देवता की होती है पूजा, शास्त्रों में जानें महत्व
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ज्योतिष न्यूज़ : अधिकांश लोग हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार का व्रत रखते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार मंगलवार का व्रत मंगलदेव को समर्पित है। इसी कारण ज्योतिषी भी मंगल दोष और उसके अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए मंगलवार का व्रत रखने की सलाह देते हैं। अधिकांश लोग ज्येष्ठ माह के पहले मंगलवार से ही यह व्रत शुरू करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस माह के मंगलवार को बड़ा मंगल माना जाता है। लोककथाओं में मान्यता है कि इसी माह के मंगलवार को हनुमान जी की भगवान राम से मुलाकात हुई थी। इसी कारण ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवार को बड़ा मंगल माना जाता है।
वर्ष 2025 में ज्येष्ठ माह 13 मई से शुरू हो रहा है। 13 मई को भी मंगलवार है। इसी कारण वर्ष 2025 का पहला बड़ा मंगल 13 मई को है। स्कंद पुराण के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था, इसलिए मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। हालाँकि, किसी भी शास्त्र या ग्रन्थ में हनुमान जी के व्रत का वर्णन नहीं मिलता है। अधिकांश शास्त्रों में मंगल के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए मंगलवार के व्रत का उल्लेख किया गया है।
शास्त्र क्या कहते हैं?
ज्योतिष में मंगल ग्रह साहस, शक्ति और युद्ध का प्रतीक है। इसके साथ ही इसे ग्रहों का सेनापति भी माना जाता है। ज्योतिष के ग्रंथ बृहस्पति संहिता के अनुसार, मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है। इस दिन व्रत, पूजा और लाल वस्त्र, तांबा या मसूर की दाल का दान करने से मंगल के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। स्कंद पुराण में भी मंगलदेव की पूजा का उल्लेख है। इसमें उल्लेख है कि मंगलवार के दिन लाल चंदन, लाल फूल और गुड़ चढ़ाकर पूजा करने से साहस और विजय की प्राप्ति होती है। नारद पुराण में मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगलवार के व्रत और मंगल यंत्र की पूजा करने का वर्णन है, जिससे क्रोध, झगड़े और दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। इन सभी शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मंगलवार का व्रत मंगलदेव के लिए है और ज्योतिष में इसका बहुत महत्व है।
हनुमान जी के व्रत का कोई उल्लेख नहीं है
भगवान हनुमान श्री राम के सबसे बड़े भक्त और संकटमोचक हैं। रामचरितमानस, रामायण और हनुमान चालीसा में उनकी महिमा का वर्णन मिलता है, लेकिन इनमें कहीं भी हनुमान जी के लिए मंगलवार व्रत का उल्लेख नहीं है। स्कंद पुराण में हनुमान जी का जन्म मंगलवार के दिन बताया गया है, जिसके कारण लोग इस दिन उनकी पूजा करते हैं। हालाँकि, इस पुराण में भी व्रत का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। शिव पुराण या विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में हनुमान जी की महिमा तो है, लेकिन मंगलवार व्रत का कोई उल्लेख नहीं है। अर्थात् शास्त्रों में हनुमान जी के लिए मंगलवार व्रत का कोई प्रमाण नहीं है।
लोक मान्यताओं के कारण यह व्रत लोकप्रिय हुआ
शास्त्रों में प्रमाण न होने के बावजूद, कई लोग हनुमान जी के लिए मंगलवार व्रत रखते हैं। इसके पीछे कुछ विशेष कारण हैं। ज्योतिष में मंगल ग्रह को शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है और हनुमान जी भी इन्हीं गुणों के लिए जाने जाते हैं। इसी कारण भक्त मंगलवार के दिन उनकी पूजा करते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने की परंपरा भी बहुत पुरानी है। भक्त इस दिन हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल चढ़ाते हैं। कुछ लोक कथाओं में मंगलवार व्रत को हनुमान जी से भी जोड़ा गया है, जैसे एक कथा के अनुसार, हनुमान जी की कृपा से एक निःसंतान दंपत्ति को संतान की प्राप्ति हुई। ये सभी बातें शास्त्रों से ज़्यादा भक्ति और लोक परंपराओं पर आधारित हैं।
मंगलवार व्रत के ये हैं लाभ
मंगलदेव के लिए मंगलवार व्रत करने से ज्योतिष में कई लाभ मिलते हैं। कुंडली में मंगल साहस, उत्साह और उन्नति का कारक है, लेकिन इसका बुरा प्रभाव झगड़े, क्रोध और परेशानियाँ ला सकता है। इसी कारण मंगलवार व्रत रखने के कई लाभ हैं।
मंगल दोष का प्रभाव कम होता है।
साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
झगड़ों और दुर्घटनाओं से सुरक्षा मिलती है।
नौकरी और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
मन शांत होता है और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
व्रत कैसे करें
मंगलदेव के लिए मंगलवार व्रत करना बहुत ही आसान और पवित्र है। सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। फिर मंगलदेव या मंगल यंत्र की पूजा करें। पूजा में लाल फूल, लाल चंदन और गुड़ चढ़ाएँ। इसके बाद 'ॐ अंग अंगारकाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। दिन में एक बार सात्विक भोजन करें, जिसमें नमक न हो। शाम को मंदिर में दीपक जलाएँ और मसूर या तांबे की वस्तुएँ दान करें। यह व्रत 21 या 45 मंगलवार तक किया जा सकता है। अंत में, विधिपूर्वक उद्यापन करें, ताकि आपको व्रत का पूरा फल मिल सके।
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