धर्म-अध्यात्म

परिवर्तिनी एकादशी पर कब करें पारण, जानें व्रत खोलने के खास नियम

nidhi
22 Sept 2026 10:28 AM IST
परिवर्तिनी एकादशी पर कब करें पारण, जानें व्रत खोलने के खास नियम
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परिवर्तिनी एकादशी 2026
धर्म डेस्क: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत इस साल 22 सितंबर 2026 मंगलवार को रखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 सितंबर रात करीब 8 बजे शुरू हुई और 22 सितंबर रात 9:43 बजे समाप्त होगी। व्रत का पारण अगले दिन यानी 23 सितंबर बुधवार को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। धार्मिक परंपरा में एकादशी व्रत का पारण उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना व्रत रखना। मान्यता है कि निर्धारित अवधि में विधिपूर्वक पारण करने से व्रत पूर्ण होता है। पारण का समय स्थान के अनुसार सूर्योदय में अंतर के कारण कुछ मिनट बदल सकता है।
परिवर्तिनी एकादशी पारण का समय
नई दिल्ली आधारित पंचांग गणना के अनुसार 23 सितंबर को पारण का समय लगभग सुबह 6:10 बजे से 8:35 बजे तक बताया गया है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर सकते हैं। एकादशी व्रत को द्वादशी के दिन पारण मुहूर्त में खोलने की परंपरा है। विशेष रूप से हरिवासर के दौरान पारण नहीं करने का विधान बताया जाता है। हरिवासर द्वादशी के शुरुआती हिस्से से जुड़ा धार्मिक काल माना जाता है और इसके समाप्त होने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। अलग-अलग पंचांग और संप्रदायों में इसकी गणना में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय परंपरा का पालन करना उचित रहता है।
कैसे करें व्रत का पारण?
23 सितंबर की सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान को तुलसी दल, पीले फूल, फल और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत पूर्ण करने का संकल्प लें।
पारण के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। कई परिवारों में तुलसी युक्त जल या प्रसाद लेकर व्रत खोलने की परंपरा है। इसके बाद फल और हल्का सात्विक भोजन लिया जा सकता है। पारण की विधि परिवार और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकती है।
परिवर्तिनी एकादशी को पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा के दौरान करवट बदलते हैं। भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
श्रद्धालुओं को ध्यान रखना चाहिए कि पारण का समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता। इसलिए 23 सितंबर को अपने स्थान के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार सही मुहूर्त देखकर ही व्रत खोलना बेहतर होगा।
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