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धर्म-अध्यात्म
कब है Sandhi Puja ?, यहां नोट करें शुभ मुहूर्त और महत्व
Harrison
27 Sept 2025 10:10 PM IST

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धर्म अध्यात्म : नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन अष्टमी और नवमी के बीच आने वाली संधि पूजा विशेष रूप से आध्यात्मिक और तांत्रिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पूजा देवी दुर्गा के अष्टम और नवम रूपों के मिलन काल में की जाती है। मान्यता है कि इसी संधि काल में देवी चामुंडा ने चंड और मुंड नामक राक्षसों का संहार किया था।
संधि पूजा शक्ति की चरम अभिव्यक्ति का प्रतीक होती है और इसे नवरात्रि का सबसे ऊर्जावान समय माना जाता है।
संधि पूजा 2025 में कब है?
संधि पूजा की तिथि:
2 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)
संधि पूजा का शुभ मुहूर्त:
प्रारंभ: 2 अक्टूबर को दोपहर 1:35 बजे
समाप्ति: 2 अक्टूबर को दोपहर 2:23 बजे
(मुहूर्त कुल 48 मिनट का होता है, जो अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में आता है)
क्या है संधि पूजा का महत्व?
संधि पूजा को "महामूर्तिकाल" भी कहा जाता है, क्योंकि इसी समय देवी दुर्गा ने अपने रौद्र रूप में चंड-मुंड का वध किया था और देवी को चामुंडा के रूप में पूजा गया। यह पूजा व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा, रोग और भय से रक्षा करती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जो भी भक्त संधि पूजा के समय मां दुर्गा की उपासना करता है, उसे देवी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पूजा तांत्रिक साधना और मनोकामना पूर्ति के लिए भी अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
कैसे करें संधि पूजा?
देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाएं।
फल, फूल, नैवेद्य और लाल चंदन से पूजा करें।
विशेष रूप से "चंडी पाठ" और "दुर्गा सप्तशती" का पाठ किया जाता है।
108 कमल के फूलों से देवी को अर्पित करने की परंपरा भी है।
संधि पूजा में 9 कन्याओं और एक लांगुर (बालक) को भोजन कराना बहुत पुण्यदायी माना गया है।
किन इच्छाओं की पूर्ति के लिए करते हैं संधि पूजा?
शत्रु पर विजय
व्यापार में सफलता
रोगों से मुक्ति
संतान प्राप्ति
मानसिक शांति
आध्यात्मिक उन्नति
निष्कर्ष:
संधि पूजा नवरात्रि के सबसे खास क्षणों में से एक होती है। यह न केवल देवी के अद्भुत रूप की पूजा है, बल्कि यह आत्मिक जागृति और ऊर्जा के संतुलन का पर्व भी है। यदि सही विधि और भाव से इस पूजा को किया जाए, तो जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो सकती हैं।
तो इस वर्ष 2 अक्टूबर को शुभ मुहूर्त में संधि पूजा अवश्य करें और मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करें।
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