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धर्म-अध्यात्म
कब है Naraka Chaturdashi ? जानें तिथि, पूजन विधि और धार्मिक महत्व
Harrison
6 Oct 2025 9:26 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू पंचांग के अनुसार, नरक चतुर्दशी या रूप चौदस दीपावली से एक दिन पहले आने वाला पावन पर्व है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध कर पृथ्वी को भय से मुक्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। साल 2025 में नरक चतुर्दशी का पर्व विशेष योग और शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा। आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी 2025 की तिथि, पूजन विधि और धार्मिक महत्व।
नरक चतुर्दशी 2025 कब है?
तिथि:
नरक चतुर्दशी 2025 में यह पर्व 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है, जिसे ‘छोटी दीवाली’ या ‘रूप चौदस’ भी कहा जाता है।
शुभ स्नान मुहूर्त (अभ्यंग स्नान):
सुबह सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में अभ्यंग स्नान करना विशेष फलदायक माना जाता है। इसे ‘नरक निवारण स्नान’ भी कहते हैं।
धार्मिक मान्यता और कथा
नरक चतुर्दशी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा नरकासुर वध की है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नामक राक्षस ने देवताओं और पृथ्वीवासियों पर अत्याचार कर रखा था। उसने 16,100 कन्याओं को बंदी बनाकर नरक में रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा हेतु नरकासुर का वध किया और कन्याओं को मुक्त कर उन्हें सम्मानजनक जीवन दिया।
इस जीत की खुशी में लोगों ने दीप जलाए और खुशियां मनाईं। तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
यह दिन अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
रूप चौदस और सौंदर्य का पर्व
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन स्त्रियां विशेष रूप से स्नान, उबटन और श्रृंगार करती हैं ताकि सौंदर्य, स्वास्थ्य और आत्मिक तेज बना रहे।
मान्यता है कि इस दिन जो सूर्योदय से पहले उबटन और अभ्यंग स्नान करता है, उसे नरक जाने का भय नहीं रहता और रूप-सौंदर्य में वृद्धि होती है।
अभ्यंग स्नान की विधि
इस दिन तिल के तेल से मालिश कर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान से पूर्व शरीर पर उबटन (बेसन, हल्दी और तेल का मिश्रण) लगाया जाता है।
स्नान विधि:
तिल या सरसों के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें।
उबटन लगाकर शरीर को साफ करें।
स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर दीपदान करें।
यमराज और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
दीपदान और यम पूजा का महत्व
नरक चतुर्दशी की रात को यमराज के नाम पर दीपदान करना अति शुभ माना गया है। घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर यमदेव से प्रार्थना की जाती है कि वे परिवार को रोग, अकाल मृत्यु और पाप से बचाएं।
यम दीपदान मंत्र:
"मृत्युना दण्डपाशाभ्यां कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम।।"
परिवारिक और सामाजिक महत्व
इस दिन घरों की विशेष सफाई और सजावट की जाती है।
दीप जलाकर बुराई और अंधकार को दूर करने का प्रतीकात्मक संदेश दिया जाता है।
यह दिन परिवारिक मेल-मिलाप, सफाई, स्वास्थ्य और शुभारंभ का दिन माना जाता है।
नरक चतुर्दशी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि यह पापों से मुक्ति, आत्मशुद्धि और सुंदर भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
साल 2025 की नरक चतुर्दशी 20 अक्टूबर को है, जो दीपावली से ठीक एक दिन पहले मनाई जाएगी। इस दिन अभ्यंग स्नान, दीपदान और पूजा के द्वारा न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि यह हमारे शरीर, मन और घर को भी पवित्र करता है। तो इस बार नरक चतुर्दशी पर जागिए समय से पहले, कीजिए स्नान और दीपों से घर और मन दोनों को कीजिए प्रकाशित।
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