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कब है मत्स्य जयंती? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त आदि के बारे में

AJAY
31 March 2022 3:44 AM GMT
कब है मत्स्य जयंती? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त आदि के बारे में
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हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मत्स्य जयंती मनाते हैं.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह (Chaitra Month) के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मत्स्य जयंती मनाते हैं. इस साल मत्स्य जयंती 03 अप्रैल दिन रविवार को है. हालांकि कुछ स्थानों पर 04 अप्रैल दिन सोमवार को भी है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में भगवान विष्णु ने चैत्र शुक्ल तृतीया को अपना पहला अवतार मत्स्य के रुप में लिया था. सृष्टि की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था. चैत्र शुक्ल तृतीया को हर साल मत्स्य जयंती मनाई जाती है और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. भगवान विष्णु की कृपा से सभी संकट एवं दुख दूर होते हैं. आइए जानते हैं इस साल मत्स्य जयंती की तिथि, पूजा मुहूर्त (Matsya Jayanti Muhurat 2022) आदि के बारे में.

मत्स्य जयंती 2022 तिथि
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया का प्रारंभ 03 अप्रैल दिन रविवार को दोपहर 12 बजकर 38 मिनट पर हो रहा है. तृतीया तिथि अगले दिन 04 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 54 मिनट तक है. तिथि का प्रारंभ 03 अप्रैल से हो रहा है, इसलिए 03 अप्रैल को मत्स्य जयंती मनाई जाएगी. हालांकि पूजा पाठ के लिए उदयातिथि की मान्यता है, इस वजह से कुछ जगहों पर 04 अप्रैल को मत्स्य जयंती मनाई जाएगी.
मत्स्य जयंती 2022 शुभ मुहूर्त

03 अप्रैल को मत्स्य जयंती के लिए ढाई घंटे का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. इस दिन मत्स्य जयंती का मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 40 मिनट से शाम 04 बजकर 10 मिनट तक है. इस मुहूर्त में आप मत्स्य जयंती मना सकते हैं.
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 06 बजकर 09 मिनट से दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक है. इस दिन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक है.
मत्स्य अवतार का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु ने पुष्पभद्रा नदी के किनारे अपना पहला अवतार मत्स्य के रुप में लिया. वह एक विशाल मछली के रुप में थे, जिसके मुख पर एक बड़ी सींग थी. सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए एक विशाल नाव का निर्माण हुआ, जिसमें सभी जीव, जंतु, पशु, पक्षी, पेड़, पौधों को रखा गया. महाप्रलय के समय मत्स्य स्वरुप में भगवान विष्णु ने उस नाव की रक्षा की, जिससे सभी की जान बची और एक नया जीवन मिला.

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