धर्म-अध्यात्म

कब है कामदा एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

Tara Tandi
6 April 2022 6:43 AM GMT
कब है कामदा एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा
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कब है कामदा एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्त को रुके हुए कार्यों में सफलता हासिल होती है।

कामदा एकादशी कब है?
कामदा एकादशी हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी है। साल 2022 में कामदा एकादशी व्रत 12 अप्रैल को रखा जाएगा। इस साल कामदा एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत कथा पढ़ने व सुनने से भक्तों को वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
कामदा एकादशी 2022 शुभ मुहूर्त-
चैत्र शुक्ल एकादशी तिथि प्रारंभ- 12 अप्रैल 2022, मंगलवार को सुबह 04 बजकर 30 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त- 13 अप्रैल 2022, बुधवार को सुबह 05 बजकर 02 मिनट पर।
उदयातिथि के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत 12 अप्रैल को रखा जाएगा।
पूजन का शुभ मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- शाम 05 बजकर 59 मिनट से सुबह 08 बजकर 35 मिनट तक। इसके साथ रवि योग भी रहेगा।
कामदा एकादशी की कथा
कामदा एकादशी की कथा प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगर से शुरू होती है। वहां पुण्डरीक नामक राजा राज्य करते थे। इस नगर में अनेक अप्सरा, किन्नर तथा गंधर्व वास करते थे। उनमें से ललिता और ललित में अत्यंत स्नेह था। एक दिन गंधर्व ललित दरबार में गाना गा रहा था। उसे पत्नी ललिता की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय एवं ताल बिगड़ने लगे। इसे कर्कट नामक नाग ने जान लिया और यह बात राजा को बता दी। राजा ने क्रोध में आकर ललित को राक्षस होने का श्राप दे दिया।
ये है व्रत विधि-
कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। कामदा एकादशी के दिन स्नान करके भगवान विष्णु का फल, फूल, दूध, पंचामृत, तिल आदि से पूजन करें। रात में सोना में सोने के बजाय भजन- कीर्तन करें और अगले दिन पूजन कर ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
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