धर्म-अध्यात्म

कजरी तीज का व्रत कब, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Subhi
12 Aug 2022 2:41 AM GMT
कजरी तीज का व्रत कब, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
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भाद्रपद माह की शुरुआत 12 अगस्त से हो रही है.हिंदू कैलेंडर का छठा महीना भाद्रपद का होता है. इस माह में कई नए त्योहार और पर्व मनाए जाते हैं. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कजरी तीज का व्रत रखती हैं.

भाद्रपद माह की शुरुआत 12 अगस्त से हो रही है.हिंदू कैलेंडर का छठा महीना भाद्रपद का होता है. इस माह में कई नए त्योहार और पर्व मनाए जाते हैं. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कजरी तीज का व्रत रखती हैं. बता दें कि कजरी तीज को कजली तीज, बूढ़ी तीज और सूतड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है.

कजरी तीज का पर्व मुख्यतः उत्तर भारत में मनाया जाता है. इस बार कजरी तीज का पर्व 14 अगस्त के दिन पड़ रहा है. कजरी तीज के दिन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विधान है. इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं, 16 ऋंगार करती हैं और मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं. आइए जानते हैं कजरी तीज की तिथि, पूजा मुहूर्त और शुभ योगों के बारे में.

कजरी तीज 2022 तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचाग के अनुसार कजरी तीज का पर्व कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाएगा. इस दिन तृतीया तिथि का आरंभ 13 अगस्त देर रात 12 बजकर 53 मिनट पर होगा और 14 अगस्त रात 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर कजरी तीज 14 अगस्त के दिन मनाई जाएगी.

इन शुभ योगों में मनाई जाएगी तीज

ज्योतिषीयों के अनुसार कजरी तीज का पर्व सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. इस दिन सुकर्मा योग का आरंभ सुबह से लेकर देर रात 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग भी रात 09 बजकर 56 मिनट से लेकर अगले दिन 15 अगस्त तक प्रातः 5 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. ये दोनों ही योग पूजा-पाठ के लिहाज से शुभ माने जाते हैं. बता दें कि इस दिन कजरी तीज का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.

कजरी तीज पूजा विधि

इस दिन अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन शुभ मुहूर्त में मिट्टी से मां पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति बनाई जाती है. एक चौकी पर पीला और लाल रंग का कपड़ा बिछा कर मां पार्वती और भगवान शिव को स्थापित किया जाता है. उसके बाद भगवान शिव को गंगाजल, गाय का दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल, फल, चंदन, शहद, धूप, दीप आदि अर्पित किया जाता है.


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