धर्म-अध्यात्म

गायत्री जयंती कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व

nidhi
23 Jun 2026 11:23 AM IST
गायत्री जयंती कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व
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गायत्री जयंती का महत्व
Gayatri Jayanti 2026: सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष महत्व है. इस पावन तिथि को वेदों की जननी, ज्ञान और विवेक की अधिष्ठात्री देवी मां गायत्री का प्राकट्य दिवस यानी गायत्री जयंती के रूप में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गायत्री का अवतरण हुआ था. उन्हें वेदमाता, देवमाता और विश्वमाता भी कहा जाता है.
गायत्री जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जून 2026 की शाम से हो रहा है, लेकिन उदयातिथि के सिद्धांत के आधार पर गायत्री जयंती 25 जून 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. गुरुवार का दिन स्वयं गुरु और ज्ञान का कारक माना जाता है, जिससे इस बार की गायत्री जयंती का महत्व कई गुना बढ़ गया है.
गायत्री जयंती: 25 जून 2026 (गुरुवार)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून 2026, शाम 06:12 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, रात 08:09 बजे तक
मां गायत्री का स्वरूप: पंचमुखी चेतना का प्रतीक
धार्मिक ग्रंथों में मां गायत्री को देवी सरस्वती, माता लक्ष्मी और माता पार्वती का संयुक्त एवं दिव्य स्वरूप माना गया है.
पंचमुख: मां गायत्री के पांच मुख सृष्टि के पांच तत्वोंपृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश तथा मनुष्य के पांच कोषोंअन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय का प्रतिनिधित्व करते हैं.
दस भुजाएं: उनकी दस भुजाएं दसों दिशाओं की रक्षक और प्रतीक मानी जाती हैं.
हंस वाहन: हंस विवेक और न्याय का सर्वोच्च प्रतीक है, जो सही और गलत में अंतर करना सिखाता है.
कैसे करें पूजा और साधना?
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो इस दिन सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनें, इसे शुभ माना जाता है. इसके बाद पूजा स्थल पर बैठकर व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. एक चौकी पर मां गायत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मां गायत्री के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाएं. इसके बाद फूल, रोली, चंदन, अक्षत, धूप-बत्ती तथा श्रृंगार सामग्री अर्पित करें. मां को फल और मिठाइयों का भोग लगाएं. इसके पश्चात गायत्री महामंत्र का कम से कम 108 बार जप करें. फिर व्रत कथा का पाठ करें. अंत में दीपक या कपूर जलाकर मां गायत्री की आरती करें तथा पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें.
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