धर्म-अध्यात्म

अजा और परिवर्तिनी एकादशी कब है जानें सही तिथि और पारण मुहूर्त

nidhi
2 Sept 2026 1:19 PM IST
अजा और परिवर्तिनी एकादशी कब है जानें सही तिथि और पारण मुहूर्त
x
एकादशी
धर्म : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है। इस तरह सामान्य तौर पर महीने में दो बार भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत रखा जाता है। सितंबर 2026 में अजा एकादशी 7 सितंबर और परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर को पड़ेगी। दोनों ही भाद्रपद महीने में आएंगी।
अजा एकादशी कब है?
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अजा एकादशी इस साल सोमवार 7 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 7 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार अजा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना और आत्मशुद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। मान्यता है कि विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है। अजा एकादशी के महात्म्य का उल्लेख पद्म पुराण से भी जोड़ा जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर को
सितंबर की दूसरी एकादशी परिवर्तिनी एकादशी होगी। इसे पार्श्व एकादशी और पद्मा एकादशी जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। साल 2026 में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत मंगलवार 22 सितंबर को रखा जाएगा।
पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए 22 सितंबर को एकादशी व्रत किया जाएगा।
क्यों खास है परिवर्तिनी एकादशी?
परिवर्तिनी एकादशी चातुर्मास के दौरान आती है। धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से योग निद्रा में रहने वाले भगवान विष्णु इस एकादशी पर करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने की भी परंपरा है।
श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा में पीले फूल, फल, तुलसी दल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। धार्मिक परंपरा में एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत करते हैं।
द्वादशी को किया जाता है पारण
एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करके किया जाता है। पारण का सटीक समय शहर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए व्रती को अपने स्थान के पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना चाहिए।
इस प्रकार सितंबर 2026 में पहला एकादशी व्रत 7 सितंबर को अजा एकादशी और दूसरा 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी के रूप में रखा जाएगा। दोनों व्रत भगवान विष्णु को समर्पित हैं और धार्मिक मान्यताओं में इनका विशेष महत्व बताया गया है।
Next Story