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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू धर्म में साल के कुछ विशेष महीने धार्मिक अनुष्ठानों, व्रतों और त्यौहारों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें से खरमास का महीना खास तौर पर श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। खरमास हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष एक विशेष समय आता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है।
खरमास का समय और अवधि
खरमास का महीना आषाढ़ या भाद्रपद के महीने में आता है। यह लगभग एक माह का होता है, लेकिन इसका सटीक समय साल और पंचांग के अनुसार बदलता रहता है। खरमास की शुरुआत अमावस्या (नई चंद्रमा) से होती है और पूर्णिमा (पूर्ण चंद्रमा) तक रहती है। इसे आषाढ़ शुक्ल पक्ष या भाद्रपद कृष्ण पक्ष में पड़ने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में विशेष रूप से पवित्रता और तपस्या की महत्ता बढ़ जाती है।
धार्मिक महत्व
व्रत और तपस्या का महीना: खरमास में धार्मिक ग्रंथों के अनुसार व्रत, पूजा और तपस्या का विशेष महत्व है। इसे देवताओं की कृपा प्राप्त करने का समय माना जाता है।
पापों का नाश: इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्य और भक्ति से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
साधना और ध्यान का समय: कई संन्यासी और धार्मिक साधक इस महीने में कठोर साधना और ध्यान में लीन रहते हैं। इसे आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है।
धार्मिक आयोजन: मंदिरों और आश्रमों में विशेष पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रद्धालु इस दौरान किसी भी अशुभ कार्य से दूर रहते हैं और धार्मिक नियमों का पालन करते हैं।
खरमास में क्या किया जाए और क्या नहीं
धार्मिक क्रियाएँ: इस महीने में लोग अधिक से अधिक धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। वे मंदिर जाते हैं, कथा और भजन सुनते हैं और दान पुण्य करते हैं।
सफाई और संयम: खरमास में घर और आसपास के क्षेत्र की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
अशुभ कार्यों से परहेज: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश, नई जमीन खरीदने जैसे शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कोई बड़ा व्यापारिक निर्णय भी इस समय में नहीं लिया जाता।
साधना और व्रत: लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, उपवास करते हैं और ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं।
आधुनिक दृष्टि से महत्व
आज के समय में भी खरमास का धार्मिक महत्व जस का तस बना हुआ है। कई लोग अपने जीवन में इस महीने को विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए समर्पित करते हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ यह समय आत्मनिरीक्षण और जीवन में संयम अपनाने का भी संदेश देता है।
खरमास हिन्दू धर्म में धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीने भर धार्मिक व्रत, पूजा, दान और तपस्या का समय होता है। इस दौरान लोग अपने घर और आसपास की सफाई करते हैं, धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं और अशुभ कार्यों से परहेज करते हैं। इसका उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति लाना है।
इस प्रकार, खरमास केवल एक धार्मिक महीने के रूप में ही नहीं, बल्कि आस्था, संयम और पुण्य प्राप्ति का प्रतीक भी है। श्रद्धालु इस महीने में अपनी भक्ति और धार्मिकता को मजबूत करने का प्रयास करते हैं।
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