धर्म-अध्यात्म

नवरात्रि के 9 दिन व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं? जानें नियम

nidhi
11 Oct 2026 4:38 PM IST
नवरात्रि के 9 दिन व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं? जानें नियम
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नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्वों में से एक है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु माता रानी की आराधना के साथ उपवास रखते हैं और सात्विक भोजन का सेवन करते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जबकि कई श्रद्धालु पहले और आखिरी दिन उपवास करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में पूजा-पाठ, संयम, स्वच्छता और सात्विक जीवनशैली का विशेष महत्व है।

लगातार नौ दिनों तक उपवास रखने के दौरान खानपान और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। सही भोजन का चुनाव करने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल सकती है, जबकि लंबे समय तक भूखे रहने या पर्याप्त पानी नहीं पीने से कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
नवरात्रि 2026 में कब से कब तक रहेंगे व्रत?
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। नौ दिनों का व्रत 19 अक्टूबर तक चलेगा। पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को नवमी और विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अष्टमी, नवमी पूजा तथा व्रत पारण के नियमों में अंतर हो सकता है।
नवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए?
नवरात्रि के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। व्रत की परंपराओं में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा, सामा के चावल और साबूदाना शामिल किए जाते हैं।
इसके अलावा दूध, दही, पनीर और छाछ का सेवन किया जा सकता है। ये खाद्य पदार्थ प्रोटीन और कैल्शियम के स्रोत हैं। व्रत में केला, सेब, पपीता, अनार और मौसमी फल भी खाए जा सकते हैं।
बादाम, अखरोट, मखाना और सीमित मात्रा में मूंगफली का सेवन भी उपयोगी हो सकता है। सब्जियों में आलू, शकरकंद, लौकी, कद्दू और खीरा जैसे विकल्प चुने जा सकते हैं।
व्रत में किन चीजों से बचना चाहिए?
पारंपरिक नवरात्रि व्रत में गेहूं, सामान्य चावल, मैदा, सूजी, बेसन और अधिकांश दालों का सेवन नहीं किया जाता। प्याज और लहसुन से भी परहेज करने की परंपरा है।
कई परिवारों में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, व्रत के खानपान संबंधी नियम क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।
स्वास्थ्य के लिहाज से अधिक तेल में तली हुई साबूदाना वड़ा, कुट्टू की पूरी, अत्यधिक मीठी मिठाइयां और ज्यादा नमक वाले पैकेटबंद फलाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना चाहिए।
नौ दिनों के व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
लगातार नौ दिन उपवास रखने वालों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए। नारियल पानी, छाछ और बिना अतिरिक्त चीनी वाले पेय भी उपयोगी हो सकते हैं।
दिनभर भूखे रहने के बाद एक साथ बहुत अधिक भोजन करने से बचें। अपनी व्रत परंपरा के अनुसार नियमित अंतराल पर फलाहार या हल्का भोजन लें।
नींद पूरी करना और अत्यधिक शारीरिक मेहनत से बचना भी महत्वपूर्ण है। यदि उपवास के दौरान चक्कर, बहुत अधिक कमजोरी, बेहोशी या उलझन महसूस हो तो व्रत जारी रखने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लें।
मधुमेह, किडनी या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं और नियमित दवाएं लेने वालों को लंबे उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए।
नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दिनों में सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनना, माता रानी की पूजा करना, दुर्गा चालीसा का पाठ करना और सात्विक जीवनशैली अपनाना शुभ माना जाता है।
श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार उपवास, पूजा-पाठ और दान-पुण्य कर सकते हैं। घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
नवरात्रि के दौरान मांसाहार, शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहने की धार्मिक परंपरा है। इसके अलावा क्रोध, अपशब्द और दूसरों के प्रति गलत व्यवहार से बचने की सीख भी दी जाती है।
यदि घर में अखंड ज्योति जलाई गई है, तो उसे पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं से सुरक्षित दूरी पर रखना चाहिए।
व्रत खोलते समय क्या खाएं?
नौ दिनों का व्रत पूरा होने के बाद अचानक बहुत भारी भोजन नहीं करना चाहिए। शुरुआत हल्के और आसानी से पचने वाले भोजन से की जा सकती है। दही, फल, खिचड़ी या सामान्य घर का हल्का भोजन बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
लंबे उपवास के बाद बहुत अधिक तला-भुना या मसालेदार भोजन करने से पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए सामान्य खानपान की ओर धीरे-धीरे लौटना चाहिए शारदीय नवरात्रि केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और संयम का अवसर भी है। धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत रखना और संतुलित आहार लेना नौ दिनों की आराधना को सुरक्षित और सहज बनाने में मदद कर सकता है।
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