धर्म-अध्यात्म

कजरी तीज पर चंद्रमा को जल चढ़ाने का क्या है महत्व

nidhi
31 Aug 2026 8:52 AM IST
कजरी तीज पर चंद्रमा को जल चढ़ाने का क्या है महत्व
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कजरी तीज पर चांद को अर्घ्य
कजरी तीज हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला व्रत है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे कजली तीज और सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। कजरी तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी विशेष मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। इसलिए तीज के पर्व पर शिव-पार्वती की पूजा वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जोड़कर देखी जाती है। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर माता पार्वती से अपने परिवार और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
चंद्रमा को क्यों दिया जाता है अर्घ्य?
कजरी तीज के दिन कई महिलाएं दिनभर व्रत रखने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन करती हैं। चंद्रमा निकलने पर जल से अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद व्रत पूरा किया जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा को मन, शीतलता, सौम्यता और सुख का प्रतीक माना गया है।
मान्यता है कि चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मन को शांति मिलती है और वैवाहिक जीवन में प्रेम तथा सामंजस्य बना रहता है। सुहागिन महिलाएं चंद्रमा से अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
कैसे दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य?
शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा की जाती है। चंद्र दर्शन होने पर स्वच्छ पात्र में जल लेकर चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। कई स्थानों पर जल में अक्षत या फूल डालकर अर्घ्य देने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके बाद महिलाएं अपने पति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कजरी तीज की पूजा विधि में अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए स्थानीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
अखंड सौभाग्य से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार कजरी तीज का व्रत श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चंद्रमा को जल अर्पित करना इसी व्रत का महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। हालांकि ये बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं।
कजरी तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं बल्कि भारतीय लोक संस्कृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। कई क्षेत्रों में महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार करती हैं, मेहंदी लगाती हैं और कजरी गीत गाती हैं। इस तरह यह त्योहार वैवाहिक सुख की कामना के साथ पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी आगे बढ़ाता है।
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