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धर्म-अध्यात्म
मातृ नवमी का पितृ दोष से क्या है संबंध, जानें ज्योतिषीय मान्यता
nidhi
2 Oct 2026 8:48 AM IST

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मातृ नवमी
हिंदू पंचांग में पितृ पक्ष के दौरान आने वाली मातृ नवमी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर उन दिवंगत मातृ पक्ष की महिलाओं का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनका निधन सुहागिन अवस्था में हुआ हो। इसे अविधवा नवमी भी कहा जाता है। ज्योतिषीय परंपराओं में मातृ नवमी को मातृ ऋण और पितृ दोष से भी जोड़कर देखा जाता है।
ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार कुंडली में चौथा भाव माता, मातृ सुख, घर और भावनात्मक सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। यदि चौथे भाव या उसके स्वामी पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो इसे कुछ ज्योतिषी मातृ पक्ष से जुड़े कर्म या ऋण के संकेत के रूप में देखते हैं।
इसके अलावा नवम भाव को पूर्वजों, भाग्य और पितृ परंपरा से जोड़ा जाता है। यदि नवम भाव, सूर्य या संबंधित ग्रहों पर अशुभ प्रभाव हो तो पारंपरिक ज्योतिष में इसे पितृ दोष से जोड़कर देखा जा सकता है। हालांकि पितृ दोष की व्याख्या अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में अलग तरीके से की जाती है।
चंद्रमा को ज्योतिष में माता का प्रमुख कारक माना गया है। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति कमजोर होने या उस पर शनि, राहु या केतु जैसे ग्रहों का प्रभाव होने पर कुछ ज्योतिषी इसे मातृ सुख में कमी या मां से जुड़े भावनात्मक संघर्षों का संकेत मानते हैं।
मातृ ऋण का अर्थ केवल आर्थिक या सांसारिक ऋण नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टि से इसे माता और मातृ पक्ष के पूर्वजों के प्रति कर्तव्य, सम्मान और स्मरण से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने से परिवार में सकारात्मकता और मानसिक शांति बढ़ती है।
मातृ नवमी के दिन श्रद्धालु दिवंगत मातृ पक्ष की महिलाओं के लिए तर्पण, पिंडदान और भोजन दान करते हैं। ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने और वस्त्र दान करने की भी परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मातृ नवमी पर श्रद्धापूर्वक किया गया श्राद्ध मातृ पक्ष के पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। वहीं ज्योतिषीय दृष्टि से इसे मातृ ऋण और पितृ दोष से जुड़े प्रभावों को शांत करने की एक पारंपरिक विधि बताया जाता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि पितृ दोष और मातृ ऋण ज्योतिषीय तथा धार्मिक अवधारणाएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित स्थितियां नहीं। फिर भी आस्था रखने वाले लोग मातृ नवमी को अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने के खास अवसर के रूप में देखते हैं।
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