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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू पंचांग में संक्रांति का विशेष महत्व है, और प्रत्येक राशि की संक्रांति अलग-अलग धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखती है। इनमें से वृश्चिक संक्रांति को विशेष स्थान प्राप्त है। यह वह समय होता है जब सूर्य मकर राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन के दौरान किए गए धार्मिक कार्य, पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
वृश्चिक संक्रांति की तिथि और समय:
वृश्चिक संक्रांति 2025 में 6 नवंबर, बुधवार को होगी। इस दिन सूर्य का वृश्चिक राशि में प्रवेश होगा, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रांति का शुभ मुहूर्त सुबह 06:30 बजे से 07:45 बजे तक रहेगा। इस समय में की गई पूजा और दान-पुण्य से जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
वृश्चिक राशि और उसका महत्व:
वृश्चिक राशि को 'गहनता, परिवर्तन और शक्ति' का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इस राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जो साहस, ऊर्जा और साहसिक निर्णयों के लिए जिम्मेदार हैं। जब सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है, तो यह समय आत्म-विश्लेषण, नई योजनाओं की शुरुआत और मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए उत्तम होता है। इस दिन ग्रहों की स्थिति अनुकूल होने के कारण, महत्वपूर्ण निर्णय लेने, निवेश करने और शिक्षा या करियर से जुड़े कदम उठाने के लिए यह समय शुभ माना जाता है।
वृश्चिक संक्रांति पर विशेष पूजा और उपाय:
इस दिन विशेष रूप से भगवान सूर्य और हनुमान जी की पूजा की जाती है। घर में साफ-सफाई करके दीपक जलाना और सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, दान-पुण्य करना इस दिन के महत्व को और बढ़ा देता है। जरूरतमंदों को भोजन देना, वस्त्र या अनाज का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
विशेष उपायों में तुलसी के पौधे की पूजा और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शामिल है। ज्योतिषियों के अनुसार, संक्रांति के दिन किए गए ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
वृश्चिक संक्रांति का स्वास्थ्य और जीवन पर प्रभाव:
वृश्चिक संक्रांति का प्रभाव न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य और जीवन पर भी पड़ता है। इस दिन सूर्य की किरणें सीधे मन और शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं। सुबह-सुबह हल्की धूप में समय बिताना, योग या प्राणायाम करना लाभकारी माना जाता है। यह दिन मानसिक तनाव कम करने, नई ऊर्जा और उत्साह पाने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उपयुक्त है।
वृश्चिक संक्रांति 2025 में 6 नवंबर को है और इसका शुभ मुहूर्त सुबह 06:30 बजे से 07:45 बजे तक रहेगा। यह समय धार्मिक अनुष्ठान, पूजा और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश से जीवन में नई ऊर्जा, साहस और सकारात्मक बदलाव आने की संभावना बढ़ती है। इस अवसर का सही तरीके से लाभ उठाकर व्यक्ति अपने जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति ला सकता है।
सही दिशा में किए गए उपाय, पूजा और सकारात्मक कार्य जीवन में सौभाग्य और सफलता लाते हैं। इसलिए, 6 नवंबर की सुबह वृश्चिक संक्रांति का लाभ उठाना और शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा करना अत्यंत लाभकारी रहेगा।
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