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धर्म : हर महीने की चतुर्थी तिथि को गणेश जी की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से साधक की सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। गणेश जी की पूजा के दौरान उन्हें दूर्वा चढ़ाने का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसे में चलिए जाने हैं दूर्वा चढ़ाने के नियम और मंत्र।
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 29 मई को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 30 मई को रात 9 बजकर 22 मिनट पर होने जा रहा है। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए ज्येष्ठ माह की विनायक चतुर्थी शुक्रवार 30 मई को मनाई जाएगी। इस दौरान गणेश जी की पूजा का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहने वाला है - विनायक चतुर्थी मुहूर्त - सुबह 10 बजकर 56 मिनट से दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक
दूर्वा चढ़ाने का महत्व: दूर्वा, जिसे दूब भी कहा जाता है, को त्रिदोष नाशक माना गया है। गणेश भगवान की पूजा में दूर्वा चढ़ाने के साथ ही मांगलिक कार्यों में भी दूर्वा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बिना कोई भी मांगलिक कार्य अधूरा होता है। आयुर्वेद में भी दूब के कई गुण बताए गए हैं, जो इसे विशेष बनाते हैं। दूर्वा चढ़ाने के नियम
भगवान गणेश की पूजा में उन्हें 21 जोड़े (21 गाठें) दूर्वा अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करना शुभ माना जाता है। इससे जातक को गणेश जी की कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। दूर्वा चढ़ाते समय उसे साफ पानी से धो लेना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि दूर्वा साफ जगह से तोड़नी चाहिए।
दूर्वा अर्पित करने का मंत्र: विनायक चतुर्थी की पूजा में गणेश भगवान को दूर्वा अर्तिप करते हुए 'श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि' मंत्र का जप करना चाहिए। ऐसा करने से विघ्नहर्ता प्रसन्न होते हैं और साधक के जीवन के सभी विघ्न हर लेते हैं।
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