धर्म-अध्यात्म

फाल्गुन माह मेंVijaya Ekadashi: शुभ मुहूर्त और राशियों पर प्रभाव

Harrison
8 Feb 2026 7:44 PM IST
फाल्गुन माह मेंVijaya Ekadashi: शुभ मुहूर्त और राशियों पर प्रभाव
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Religion Spirituality ,धर्म अध्यात्म : वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 13 फरवरी को फाल्गुन माह में विजया एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व हर साल शिवरात्रि से पहले आता है और इसे खासतौर पर लक्ष्मी नारायण की पूजा और एकादशी व्रत के लिए जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु मनचाही मुराद पाने और जीवन में शुभता लाने के लिए व्रत रखते हैं। माना जाता है कि इस व्रत के पालन से साधक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है और अनजाने में किए गए पाप भी समाप्त हो जाते हैं।
विजया एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह एकादशी मनाने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, सुख और शांति आती है। इस दिन उपवास रखने वाले सुबह से ही शुद्ध स्नान करते हैं और लक्ष्मी नारायण की पूजा करते हैं। पूजा में फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही, भक्त शास्त्रों का पाठ करते हैं और रात्रि तक उपवास बनाए रखते हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार, विजया एकादशी से एक दिन पहले चंद्र देव की चाल में बदलाव होगा। यह बदलाव
मन और भावनाओं पर स
कारात्मक प्रभाव डालता है। वहीं, सोम देव की चाल में परिवर्तन कुछ राशियों के लिए विशेष लाभकारी साबित होगा। यह राशि के जातकों को वित्तीय और पारिवारिक मामलों में सफलता, नौकरी या व्यवसाय में लाभ और जीवन में खुशहाली प्रदान करेगा।
विशेष रूप से जिन राशियों पर चंद्र और सोम देव की चाल सकारात्मक प्रभाव डालेगी, उनके जीवन में नए अवसर और शुभ समाचार आएंगे। उन्हें लंबे समय से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलेगी और कठिनाइयों में कमी आएगी। इस दिन की पूजा और व्रत रखने से न केवल व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन में लाभ होगा, बल्कि घर और परिवार में भी सुख-समृद्धि का माहौल बनता है।
विजया एकादशी का व्रत करने की विधि सरल है। सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल को स्वच्छ कर दीप और धूप जलाएं। लक्ष्मी नारायण के चित्र या मूर्ति के सामने फल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें। व्रत रखने वाले दिनभर अन्न और जल का संयम रखते हैं। रात्रि को कथा और शास्त्र का पाठ कर व्रत पूरा किया जाता है। कुछ भक्त इस दिन अपने घर में पवित्र माहौल बनाए रखने के लिए ध्यान और भजन भी करते हैं।
विजया एकादशी का पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्रत न केवल पापों को दूर करने और मंगल लाने के लिए किया जाता है, बल्कि यह आध्यात्मिक उन्नति का भी माध्यम है। श्रद्धालु इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण की भक्ति में लीन रहते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और आंतरिक शांति की कामना करते हैं।
इस अवसर पर ज्योतिषीय दृष्टि से लाभार्थी राशियों को अपने कार्यों में विशेष सतर्कता और योजना के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है। इस दिन शुभ कार्यों की शुरुआत करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। व्रत और पूजा के साथ-साथ अपनी कर्मभूमि पर ध्यान देना भी लाभकारी होगा।
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