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वास्तु शास्त्र: किचन में मंदिर रखना क्यों माना जाता है अशुभ

Religion Desk धर्म डेस्क : वास्तु शास्त्र में घर के प्रत्येक स्थान का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन किचन और मंदिर को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। किचन को माता अन्नपूर्णा का स्थान कहा जाता है, जहां भोजन बनता है और पूरे परिवार का पोषण होता है। वहीं मंदिर को घर का सबसे पवित्र कोना माना जाता है, जहां देवी-देवताओं का वास होता है और वहां से घर में सकारात्मक तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
कई घरों में जगह की कमी या सुविधा के कारण लोग किचन में ही छोटा मंदिर या पूजा स्थान बना लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार यह उचित नहीं माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किचन और मंदिर दोनों की ऊर्जा और उद्देश्य अलग-अलग होते हैं, इसलिए इन्हें एक ही स्थान पर रखना शुभ नहीं होता।
वास्तु के अनुसार किचन में आग, गर्मी, तेल और मसालों का प्रयोग होता है, जबकि मंदिर में शांति, ध्यान और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण आवश्यक होता है। ऐसे में दोनों की ऊर्जा एक-दूसरे के विपरीत मानी जाती है। कहा जाता है कि इस तरह का संयोजन घर में मानसिक असंतुलन और नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर को हमेशा साफ-सुथरे, शांत और स्थिर स्थान पर रखना चाहिए, जहां पूजा के समय ध्यान भंग न हो। वहीं किचन एक व्यस्त और सक्रिय स्थान होता है, जहां लगातार काम चलता रहता है। इसलिए इन दोनों को एक साथ रखना उचित नहीं माना जाता।
वास्तु विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि घर में अलग पूजा कक्ष की व्यवस्था संभव न हो, तो कम से कम मंदिर को किचन से दूर और उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में स्थापित करना चाहिए, जिसे सबसे शुभ दिशा माना जाता है।
इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि किचन में पूजा करने से भोजन की पवित्रता और ऊर्जा पर असर पड़ सकता है, क्योंकि वहां रोजमर्रा के कार्य और भोजन निर्माण की प्रक्रिया चलती रहती है। इससे आध्यात्मिक वातावरण में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
हालांकि आधुनिक समय में छोटे घरों और फ्लैट्स में स्थान की कमी के कारण लोग किचन या अन्य जगहों पर ही पूजा स्थल बना लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे आदर्श स्थिति नहीं माना गया है। ऐसे में लोग कोशिश करते हैं कि कम से कम पूजा स्थान को साफ-सुथरा और अलग पहचान वाला स्थान दिया जाए।
कुल मिलाकर, वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर और किचन दोनों ही महत्वपूर्ण लेकिन अलग-अलग ऊर्जा वाले स्थान हैं। इसलिए इन्हें अलग रखना ही घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए बेहतर माना जाता है।





