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धर्म-अध्यात्म
रक्षाबंधन के दिन होगी वरुण देव की पूजा जानें नारली पूर्णिमा का महत्व
nidhi
27 Aug 2026 11:13 AM IST

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नारली पूर्णिमा की परंपरा
धर्म : सावन पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इसी दिन जहां देशभर में भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है, वहीं तटीय क्षेत्रों में मछुआरा समुदाय के लोग नारली पूर्णिमा का उत्सव भी मनाते हैं। साल 2026 में नारली पूर्णिमा और रक्षाबंधन का पर्व एक ही दिन यानी 28 अगस्त को मनाया जाएगा।
नारली पूर्णिमा खासतौर पर महाराष्ट्र, कोंकण और समुद्र किनारे रहने वाले मछुआरा समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन मछुआरे समुद्र और जल के देवता भगवान वरुण की पूजा करते हैं और सुरक्षित समुद्री यात्रा तथा अच्छी आजीविका की कामना करते हैं। मान्यता है कि पूजा के बाद मछुआरे नए मछली पकड़ने के मौसम की शुरुआत करते हैं।
नारली पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?
मान्यताओं के अनुसार, मानसून के समय समुद्र में तेज लहरों और खराब मौसम के कारण मछुआरे समुद्र में जाने से बचते हैं। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद नारली पूर्णिमा के दिन समुद्र देव और वरुण देव की आराधना कर दोबारा समुद्र में जाने की शुरुआत की जाती है। इस पर्व के माध्यम से मछुआरे प्रकृति और जल के प्रति आभार भी व्यक्त करते हैं।
वरुण देव की पूजा कैसे की जाती है?
नारली पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान के बाद समुद्र किनारे या जल स्रोत के पास पूजा की जाती है। पूजा में नारियल, फूल, अक्षत, दीपक, मिठाई और जल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भगवान वरुण से समुद्र को शांत रखने और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
इस दिन विशेष रूप से नारियल का महत्व होता है। मछुआरे सजाए गए नारियल को समुद्र देव को अर्पित करते हैं। कई जगहों पर लोग अपनी नावों को सजाकर उनकी पूजा भी करते हैं और समुद्र में सुरक्षित यात्रा की कामना करते हैं।
नारियल चढ़ाने की परंपरा
नारली पूर्णिमा में नारियल अर्पित करने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि नारियल पवित्र फल माना जाता है। इसे समुद्र में अर्पित कर लोग भगवान वरुण से सुरक्षा और अच्छे भविष्य की प्रार्थना करते हैं। इस कारण इस पर्व का नाम भी नारली पूर्णिमा पड़ा।
रक्षाबंधन और नारली पूर्णिमा का संबंध
श्रावण पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन और नारली पूर्णिमा दोनों पर्व मनाए जाते हैं। जहां रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते और रक्षा के वचन का प्रतीक है, वहीं नारली पूर्णिमा जल, प्रकृति और समुद्र से जुड़े लोगों की आस्था का पर्व है।
नारली पूर्णिमा केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि समुद्र पर निर्भर लाखों लोगों की संस्कृति और जीवनशैली से जुड़ा पर्व है। यह पर्व इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन और सम्मान का संदेश देता है।
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