धर्म-अध्यात्म

असम की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएगा ‘उत्सव आरंभ’, जानें क्या है खास

nidhi
18 Oct 2026 3:08 PM IST
असम की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएगा ‘उत्सव आरंभ’, जानें क्या है खास
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गुवाहाटी हवाई अड्डे की खास पहल
असम के गुवाहाटी में स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने 'उत्सव आरंभ' नाम की एक पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य यात्रियों के सामने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय हस्तशिल्प को पेश करना है। यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब पूरा देश शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा मना रहा है।
इस पहल के तहत हवाई अड्डे के 'अराइवल विलेज' (आगमन क्षेत्र) में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और एक पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है।
गुवाहाटी हवाई अड्डे ने 'उत्सव आरंभ' की शुरुआत की
लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने 'उत्सव आरंभ' नामक एक नई उत्सव-संबंधी पहल शुरू की है। इसमें लाइव संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल हैं, जो दुर्गा पूजा की भावना को दर्शाती हैं। यात्री यहां स्थानीय हस्तशिल्प देख सकते हैं, और 'अराइवल विलेज' में लगे फूड स्टॉल्स पर पारंपरिक मिठाइयों और तरह-तरह की चाट का आनंद ले सकते हैं।
सांस्कृतिक और फूड स्टॉल्स के साथ-साथ एक पुस्तक मेले का भी आयोजन किया गया है, जिसका मकसद यात्रियों और आने वाले लोगों को असम की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराना है।
'उत्सव आरंभ' क्या है?
'उत्सव आरंभ' एक सांस्कृतिक पहल है, जिसे गुवाहाटी हवाई अड्डे पर उत्सव का माहौल बनाने के लिए शुरू किया गया है। इसके जरिए एक ऐसी जगह तैयार की गई है, जहां यात्री असम की विरासत से जुड़ी चीजों का अनुभव कर सकें।
'अराइवल विलेज' इस पहल का मुख्य केंद्र है, जहां इस क्षेत्र की संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को एक साथ लाया गया है। पारंपरिक प्रस्तुतियों से लेकर स्थानीय हस्तशिल्प तक, यह पहल यात्रियों को हवाई अड्डे से गुजरते हुए राज्य की कलात्मक और सांस्कृतिक विविधता को जानने का मौका देती है।
पूर्वोत्तर संस्कृति की एक झलक
'उत्सव आरंभ' की सबसे खास बातों में से एक है - स्थानीय संस्कृति और परंपराओं पर इसका जोर। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां क्षेत्रीय कला रूपों को प्रदर्शित करने का मंच देती हैं, जबकि हस्तशिल्प की प्रदर्शनी स्थानीय कारीगरों के हुनर ​​को सामने लाती है।
पारंपरिक खान-पान के जरिए लोग असम की पाक-कला और विरासत को जान सकते हैं। वहीं, पुस्तक मेला पढ़ने की आदत को बढ़ावा देता है और साहित्य से जुड़ने का एक मंच प्रदान करता है।
हवाई अड्डे के परिसर में इन सभी चीजों को एक साथ लाकर, यह पहल यात्रियों को पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव करने का एक बेहतरीन अवसर देती है।
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