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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू धर्म में तुलसी विवाह एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। यह त्योहार तुलसी (हoly basil) और भगवान विष्णु के अवतार श्री शालीग्राम के विवाह के रूप में मनाया जाता है। यह धार्मिक अनुष्ठान परिवार में सुख, समृद्धि और मंगल की वृद्धि के लिए किया जाता है।
तुलसी विवाह की तिथि 2025:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी विवाह हर साल वैषाख मास की पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है। इस वर्ष, तुलसी विवाह 26 अप्रैल, 2025 को मनाया जाएगा। इसे वैष्णवों और अन्य हिंदू परिवारों द्वारा बड़े उत्साह और धार्मिक भावना के साथ संपन्न किया जाता है।
तुलसी विवाह का महत्व:
तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय पौधा माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, तुलसी विवाह करने से घर में सुख-शांति, स्वास्थ्य और धन की वृद्धि होती है। इसे व्रत, पूजा और उपवास के साथ संपन्न करने से भक्तों के मनोबल और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है।
पूजा की सामग्री:
तुलसी विवाह में कुछ विशिष्ट सामग्री की आवश्यकता होती है, जो पूजा को पूर्ण और शुभ बनाती हैं। पूजा सामग्री में मुख्य रूप से शामिल हैं:
तुलसी का पौधा (घर या मंदिर में लगाकर विशेष स्थान पर रखा जाए)
शालीग्राम या विष्णु की मूर्ति
लाल कपड़ा (विवाह के लिए)
रोली, चंदन और कुमकुम
फूल और मौली
नारियल और हल्दी
मिठाई और फलों का भोग
दीपक और अगरबत्ती
पूजा विधि:
तुलसी विवाह का प्रारंभ सुबह से ही किया जाता है। सबसे पहले तुलसी की पवित्र सफाई की जाती है और उसे लाल कपड़े से सजाया जाता है। उसके बाद शालीग्राम या विष्णु की मूर्ति को तुलसी के सामने स्थापित किया जाता है।
पूजा के दौरान मंत्रों का जाप और आरती की जाती है। पंडित या घर के वरिष्ठ सदस्य विवाह का व्रत कराते हैं। इस दौरान तुलसी और शालीग्राम का symbolic विवाह संपन्न होता है। भक्त विशेष फल, मिठाई और फूल चढ़ाकर वर-वधू के रूप में तुलसी और शालीग्राम को आशीर्वाद देते हैं।
विशेष टिप्स:
तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजे से दोपहर तक होता है।
विवाह के दिन तुलसी के पास हल्दी और सिंदूर का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।
भक्त प्रायः तुलसी के पौधे को घर के मध्य भाग या पूजा स्थान पर रखते हैं।
पूजा के बाद भोग प्रसाद के रूप में मिठाई और फल वितरित किए जाते हैं।
तुलसी विवाह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह केवल एक पूजा नहीं, बल्कि घर और परिवार के लिए मंगल और समृद्धि लाने का प्रतीक भी है। इस दिन तुलसी और शालीग्राम के विवाह के माध्यम से भगवान विष्णु और तुलसी के प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है। सही मुहूर्त और सामग्री के साथ यह अनुष्ठान भक्तों को धार्मिक संतोष और मानसिक शांति प्रदान करता है।
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