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धर्म-अध्यात्म
पितृ पक्ष में आजमाएं पीपल के पत्तों का उपाय संकटों से मिलेगी राहत
Ratna Netam
5 Oct 2026 7:19 PM IST

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धर्म : पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हुए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक किए गए कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी दौरान हनुमान जी की पूजा से जुड़े कुछ पारंपरिक उपाय भी किए जाते हैं। इनमें 21 पीपल के पत्तों से जुड़ा उपाय काफी प्रचलित है। मान्यता है कि मंगलवार या शनिवार के दिन श्रद्धा से यह उपाय करने पर जीवन की परेशानियों से राहत और मन को शांति मिल सकती है।
धार्मिक परंपराओं में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। वहीं हनुमान जी की पूजा मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से की जाती है। इसी कारण पितृ पक्ष के दौरान इन दिनों में 21 पीपल के पत्तों की माला बनाकर बजरंगबली को अर्पित करने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है।
इस उपाय को करने के लिए सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पीपल के पेड़ से 21 साफ और साबुत पत्ते लें। धार्मिक मान्यता के अनुसार पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। जमीन पर गिरे हुए साफ और साबुत पत्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इन पत्तों को साफ पानी से धोकर सूखने दें। इसके बाद प्रत्येक पत्ते पर चंदन या सिंदूर की सहायता से भगवान राम का नाम लिखा जा सकता है। सभी 21 पत्तों को धागे की सहायता से जोड़कर माला तैयार करें। माला बनाते समय मन में भगवान राम और हनुमान जी का स्मरण करने की परंपरा है।
इसके बाद हनुमान मंदिर जाकर यह माला हनुमान जी को अर्पित करें। मंदिर जाना संभव न हो तो घर में हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा के सामने पूजा की जा सकती है। दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
धार्मिक मान्यताओं में हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है। भक्तों का विश्वास है कि उनकी आराधना से भय, चिंता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक शक्ति मिलती है। पितृ पक्ष में यह उपाय करने के पीछे भी यही धार्मिक भावना जुड़ी हुई है।
21 की संख्या को भी कई धार्मिक परंपराओं में शुभ माना जाता है। इसी कारण हनुमान जी को 21 पीपल के पत्तों की माला चढ़ाने का विधान प्रचलित है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि अलग हो सकती है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करना भी उचित माना जाता है।
पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और जरूरतमंदों को भोजन कराने जैसी परंपराओं का विशेष महत्व है। इसलिए 21 पीपल के पत्तों वाला उपाय श्राद्ध या तर्पण का विकल्प नहीं माना जाता। इसे हनुमान जी की आराधना से जुड़ी एक अलग धार्मिक परंपरा के रूप में किया जाता है।
इस दौरान दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपड़े या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य जरूरी वस्तुएं देना शुभ माना जाता है। पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करना भी कई परिवारों की पितृ पक्ष परंपराओं का हिस्सा है।
हनुमान जी की पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। पूजा के दौरान मन शांत रखें और किसी के प्रति बुरे विचार न रखें। मान्यता है कि केवल धार्मिक सामग्री चढ़ाने से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, सदाचार और सेवा की भावना है।
पीपल के पत्तों को लेकर भी सावधानी रखनी चाहिए। पूजा के नाम पर पेड़ की शाखाओं को नुकसान पहुंचाने या बड़ी संख्या में पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए। यदि स्थानीय धार्मिक परंपरा में पेड़ से पत्ते लेने की अनुमति न हो तो किसी जानकार पुरोहित से विधि समझी जा सकती है।
पितृ पक्ष आत्मचिंतन, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और धार्मिक कर्मों का समय माना जाता है। ऐसे में 21 पीपल के पत्तों की माला हनुमान जी को अर्पित करने का यह उपाय आस्था से जुड़ी परंपरा है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इसे श्रद्धापूर्वक करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना की जाती है। हालांकि इसके परिणाम धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें किसी समस्या के निश्चित समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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