धर्म-अध्यात्म

Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग, 8 मार्च 2026

Subhi
8 March 2026 6:24 AM IST
Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग, 8 मार्च 2026
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रविवार, 8 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण पंचमी के साथ 'रंग पंचमी' का उत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान कृष्ण और राधा रानी के दिव्य प्रेम की स्मृति में होली के समापन का प्रतीक है। आज चंद्रदेव तुला राशि और स्वाती नक्षत्र में रहेंगे, जिसके देवता पवन देव हैं। स्वाती नक्षत्र के प्रभाव से स्वभाव में शालीनता और खुद पर नियंत्रण बना रहेगा, जिससे जीवन का संचालन करने में मदद मिलेगी। ध्रुव योग और तैतिल करण का संयोग मन में शांति और बड़ी इच्छाएं पूरी करने के लिए नई उमंग लेकर आएगा। शुभ कार्यों के लिए दोपहर 12:09 से 12:56 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त उत्तम है।

महत्वपूर्ण विवरण

तिथि कृष्ण पंचमी – रात्रि 09:10 बजे तक, फिर षष्ठी

योग ध्रुव – प्रातः 07:04 बजे तक, फिर व्याघात

करण कौलव – प्रातः 08:10 बजे तक

करण तैतिल – रात्रि 09:10 बजे तक, फिर गरज

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय प्रातः 06:39 बजे

सूर्यास्त का समय सायं 06:25 बजे

चंद्रोदय का समय

रात्रि 11:08 बजे

चंद्रास्त का समय प्रातः 09:04 बजे

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं

चन्द्र देव: तुला राशि में स्थित हैं

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक

अमृत काल प्रातः 06:25 बजे से प्रातः 08:11 बजे (9 मार्च) तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल सायं 04:57 बजे से सायं 06:25 बजे तक

गुलिकाल दोपहर 03:29 बजे से सायं 04:57 बजे तक

यमगण्ड

दोपहर 12:32 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव स्वाती नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

स्वाती नक्षत्र: दोपहर 01:31 बजे तक

सामान्य विशेषताएं: स्वतंत्र स्वभाव, लचीले, शिष्ट व्यवहार, बुद्धिमान, कुशल प्रशासक, कूटनीतिज्ञ, आत्म-नियंत्रण रखने वाले, कर्तव्यपरायण, कानूनप्रिय, शांतिप्रिय, दयालु, आकर्षक और सुंदर।

नक्षत्र स्वामी: राहु

राशि स्वामी: शुक्रदेव

देवता: वायुदेव (पवन के देवता)

प्रतीक: हवा में झूलता हुआ नया अंकुर

आज रंग पंचमी है

रंग पंचमी 2026

पंचमी तिथि प्रारंभ: 07 मार्च, 2026 को शाम 07:17 बजे

पंचमी तिथि समाप्त: 08 मार्च, 2026 को रात 09:10 बजे

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष पंचमी को रंग पंचमी मनाई जाती है। यह पर्व होली के पांचवें दिन भगवान कृष्ण और श्री राधा रानी जी के दिव्य प्रेम की स्मृति में मनाया जाता है, जिसे देव पंचमी भी कहते हैं। भारत के कई हिस्सों, विशेषकर मथुरा और उज्जैन में इस दिन होली उत्सव का समापन होता है।

उज्जैन में हुरियारों की टोलियों पर सुगंधित रंगों की बौछार की जाती है, जो जीवन के सही संचालन और आपसी प्रेम का प्रतीक है। यह उत्सव भक्तों के मन में नई उमंग भरता है और उनकी बड़ी इच्छाएं पूरी करने की प्रेरणा देता है। बेहतर मार्गदर्शन और जीवन के सही संचालन के लिए आप एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों से बात कर सकते हैं।

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