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नवरात्रि का तीसरा दिन आज, जानें मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

nidhi
13 Oct 2026 9:01 AM IST
नवरात्रि का तीसरा दिन आज, जानें मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
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मां चंद्रघंटा को चढ़ाएं ये प्रिय भोग
धर्म डेस्क: शारदीय नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना करने से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मां का यह स्वरूप शक्ति, वीरता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और देवी को फूल, फल, मिठाई तथा विशेष भोग अर्पित करते हैं। पंचांग के अनुसार आज आश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है।
मां चंद्रघंटा की पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा की तारीख
13 अक्टूबर 2026, मंगलवार
तिथि
आश्विन शुक्ल तृतीया
ब्रह्म मुहूर्त (लगभग)
सुबह 4:41 से 5:31 बजे
अभिजीत मुहूर्त (लगभग)
सुबह 11:44 से दोपहर 12:30 बजे
ये प्रकाशित पंचांग में दिए गए संदर्भ समय हैं। स्थानीय सूर्योदय और शहर के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी का वाहन सिंह है और उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र तथा कमल आदि सुशोभित माने जाते हैं। उनका यह स्वरूप भक्तों को साहस और निर्भयता की प्रेरणा देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की पूजा से नकारात्मक विचारों और भय से मुक्ति मिलने की कामना की जाती है। देवी की उपासना में श्रद्धा और मन की एकाग्रता को विशेष महत्व दिया गया है।
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। देवी के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्हें कुमकुम, अक्षत, लाल या पीले फूल तथा फल अर्पित करें। इसके बाद मां चंद्रघंटा का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जाप करें। पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या माता की स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है। अंत में देवी की आरती करके प्रसाद बांटें।
मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग
धार्मिक परंपराओं में मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां, खीर और अन्य सात्विक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। विशेष रूप से दूध की खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल और मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजा का मंत्र
देवी मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
इस मंत्र का जाप मां चंद्रघंटा की आराधना के दौरान किया जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब महिषासुर नामक असुर ने देवताओं को पराजित कर तीनों लोकों में आतंक मचाया, तब देवताओं की शक्तियों से मां दुर्गा प्रकट हुईं। देवताओं ने देवी को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए और हिमालय ने उन्हें सिंह वाहन दिया। मां दुर्गा ने महिषासुर और उसकी सेना से भयंकर युद्ध किया। देवी की शक्ति के सामने असुरों की सेना टिक नहीं सकी और अंततः महिषासुर का वध हुआ। मां चंद्रघंटा के स्वरूप को इसी दिव्य शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है।
तीसरे दिन किस रंग के कपड़े पहनें?
शारदीय नवरात्रि 2026 के तीसरे दिन का निर्धारित रंग लाल है। लाल रंग शक्ति, साहस और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। भक्त चाहें तो लाल रंग के वस्त्र पहनकर देवी की पूजा कर सकते हैं। माता को लाल पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति और मन को संतुलित रखने की प्रेरणा देती है। नवरात्रि में देवी की पूजा के साथ श्रद्धा, संयम और सकारात्मक विचारों को विशेष महत्व दिया जाता है।
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