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आज ज्येष्ठ महीने का पहला सोम प्रदोष व्रत है. इस दिन इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा- अर्चना की आती है.
आज ज्येष्ठ महीने का पहला सोम प्रदोष व्रत है. इस दिन इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा- अर्चना की आती है. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. पंचांग के मुताबिक हर महीने की त्रयोदशी तिथि को दोनों पक्षों में इस व्रत को रखा जाता है. हर प्रदोष का मतलब उसके दिन के हिसाब से अलग होता है.
इस बार प्रदोष व्रत के दिन सोमवार दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं. प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) हर महीने में एकादशी की तरह दो बार मनाया जाता है. साल में 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं. सोमवार का दिन भगवान शिव की समर्पित होता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस दिन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के बारे में.
पूजा का शुभ मुहूर्त
सोम प्रदोष व्रत आरंभ – 07 जून को सुबह 08 बजकर 48 मिनट पर हो रहा है और समाप्त 08 जून की सुबह 11 बजकर 24 मिनट पर होगा. सोम प्रदोष व्रत के पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 17 मिनट से 09 बजकर 18 मिनट तक होगा.
प्रदोष व्रत महत्व
प्रदोष व्रत की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है. जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा का बुरा प्रभाव हों उन्हें निष्ठा और नियम पूर्वक व्रत रखना चाहिए. इसके अलावा ये व्रत संतान प्राप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है.
पूजा विधि
सोम प्रदोष व्रत के दिन व्यक्ति को सुबह- सुबह स्नान करने के बाद व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि- विधान से पूजा अर्चना करना चाहिए. सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को श्रृंगार की चीजें अर्पित की जाती हैं. इस दिन फलाहार व्रत रखना चाहिए. प्रदोष व्रत की पूजा शाम को करना चाहिए.
क्या खाएं क्या नहीं
प्रदोष व्रत के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा पूरे दिन फलाहार रखा जाता है. आप चाहें तो हरी मूंग का सेवन कर सकते हैं. व्रत के दौरान नमक वाली चीजों का सेवन न करें.
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