धर्म-अध्यात्म

सास की गैरमौजूदगी में किसे दें बायना, जानें परंपरा

Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 2:14 PM IST
सास की गैरमौजूदगी में किसे दें बायना, जानें परंपरा
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Karwa Chauth 2026 : हिंदू धर्म में करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। करवा चौथ की पूजा में सरगी, व्रत कथा, चंद्रमा को अर्घ्य और बायना देने की परंपरा का विशेष महत्व है। कई परिवारों में मान्यता है कि सास को बायना दिए बिना करवा चौथ की रस्म पूरी नहीं होती। लेकिन अगर किसी महिला की सास दूसरे शहर में रहती हैं या उनका निधन हो चुका है, तो ऐसी स्थिति में बायना किसे देना चाहिए? धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इसके कई विकल्प बताए गए हैं। आइए जानते हैं बायना देने की सही विधि, सामग्री और उससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
करवा चौथ पर बायना देने की परंपरा क्यों है खास?
करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करती हैं। शाम को करवा माता, भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस दौरान करवा चौथ की कथा सुनने और चंद्रमा के दर्शन करने की भी परंपरा है।कई परिवारों में पूजा के बाद बहू अपनी सास को बायना देती है। इसमें कपड़े, फल, मिठाई, श्रृंगार सामग्री और शगुन के रुपये रखे जाते हैं।सास बायना स्वीकार करने के बाद बहू को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती हैं। इस रस्म को परिवार में प्रेम, सम्मान और अपनापन बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।हालांकि, बायना देने की परंपरा सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है। कुछ परिवारों में यह रस्म पूजा से पहले होती है, जबकि अन्य परिवारों में पूजा के बाद निभाई जाती है।
सास दूसरे शहर या विदेश में रहती हैं तो ऐसे दें बायना
आजकल नौकरी, कारोबार और अन्य कारणों से कई महिलाएं अपने ससुराल से दूर रहती हैं। ऐसे में करवा चौथ के दिन सास को व्यक्तिगत रूप से बायना देना संभव नहीं हो पाता।वास्तु विशेषज्ञ मान्या के अनुसार, यदि सास दूसरे शहर या विदेश में रहती हैं, तो उनके नाम से बायने की थाली तैयार करके पूजा स्थल पर रखी जा सकती है।इस थाली में साड़ी, मिठाई, फल, शगुन के रुपये और अन्य सामग्री रख सकते हैं। पूजा पूरी होने के बाद सास से फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से बात करके उनका आशीर्वाद लें।इसके बाद बायने की सामग्री सुरक्षित रख लें। जब भी सास से मुलाकात हो, तब उन्हें यह सामग्री भेंट की जा सकती है।इस तरह दूरी के कारण पारंपरिक रस्म निभाने में कोई परेशानी नहीं होगी। श्रद्धा और सम्मान के साथ बायना तैयार करना ही इस परंपरा की मुख्य भावना मानी जाती है।
सास का निधन हो चुका है तो किसे दें बायना?
जिन महिलाओं की सास का निधन हो चुका है, उनके मन में अक्सर सवाल रहता है कि करवा चौथ का बायना किसे दिया जाए।प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी महिलाएं अपनी बड़ी जेठानी या ननद को बायना दे सकती हैं।यदि परिवार में जेठानी या ननद मौजूद नहीं हैं, तो ससुराल पक्ष की किसी अन्य वरिष्ठ महिला को भी बायना दिया जा सकता है।मौसी सास, बुआ सास या परिवार की किसी बुजुर्ग महिला को सम्मानपूर्वक बायना भेंट करना भी कई परिवारों में स्वीकार्य माना जाता है।कुछ परंपराओं में अपनी मां या बड़ी बहन को भी बायना देने का विकल्प बताया गया है।हालांकि, इसके लिए कोई एक सार्वभौमिक नियम नहीं है। इसलिए परिवार की पुरानी परंपरा को ध्यान में रखना उचित माना जाता है।
घर में कोई बड़ी महिला नहीं है तो क्या करें?
कई बार महिलाएं ऐसे शहरों में रहती हैं, जहां उनके परिवार या रिश्तेदारों में कोई वरिष्ठ महिला आसपास नहीं होती।ऐसी स्थिति में भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, बायना किसी सम्मानित बुजुर्ग महिला या परिचित सुहागिन महिला को दिया जा सकता है।कुछ परिवारों में मंदिर जाकर बायने की सामग्री दान करने का भी रिवाज है।इसके अलावा माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करके पूजा की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं में माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी विशेष व्यक्ति को बायना न दे पाने से व्रत निष्फल हो जाता है, ऐसा कोई सर्वमान्य नियम नहीं है। परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इस रस्म को निभाया जा सकता है।
करवा चौथ के बायने की थाली में क्या-क्या रखें?
करवा चौथ का बायना तैयार करते समय उसमें शुभ मानी जाने वाली वस्तुएं रखी जाती हैं।आमतौर पर बायने की थाली में साड़ी या सूट, मिठाई, फल, नारियल, शगुन के रुपये, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल की जाती है।कुछ परिवारों में करवा, दीपक और मेहंदी रखने का भी रिवाज है।यदि सास विधवा हैं, तो कुछ परंपराओं में उन्हें बायना देते समय सुहाग से संबंधित सामग्री अलग रखी जाती है। हालांकि, यह पूरी तरह पारिवारिक रीति-रिवाज पर निर्भर करता है।बायने की सामग्री अपनी आर्थिक स्थिति और सुविधा के अनुसार रखी जा सकती है। इसके लिए महंगे कपड़े या उपहार खरीदना आवश्यक नहीं है।
बायना देने की सही विधि क्या है?
करवा चौथ के दिन शाम को पूजा की तैयारियां पूरी करने के बाद बायने की थाली सजाई जाती है।थाली में मिठाई, फल, वस्त्र और शगुन के रुपये रखें। इसके बाद घर की परंपरा के अनुसार रोली और अक्षत अर्पित करें।
कई परिवारों में पूजा के दौरान थाली को विशेष विधि से घुमाने की रस्म भी निभाई जाती है।इसके बाद बहू अपनी सास या परिवार की वरिष्ठ महिला को बायना देकर उनका आशीर्वाद लेती है।जहां सास मौजूद नहीं हैं, वहां पहले से निर्धारित पारिवारिक परंपरा के अनुसार दूसरी महिला को बायना दिया जा सकता है।बायना देने का समय और विधि अलग-अलग परिवारों में बदल सकती है। इसलिए अपने परिवार में चली आ रही परंपरा के अनुसार रस्म निभाना बेहतर है।
बायना नहीं दे पाने पर क्या अधूरा रह जाएगा व्रत?
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, करवा चौथ का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा, प्रेम और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना है।बायना देना कई परिवारों में महत्वपूर्ण रस्म जरूर है, लेकिन परिस्थितिवश इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं दे पाने पर घबराने की जरूरत नहीं है।यदि सास दूर रहती हैं, तो उनके नाम से बायना निकालकर बाद में भेंट किया जा सकता है। वहीं, सास के जीवित न होने पर किसी वरिष्ठ महिला को यह सामग्री देने की परंपरा अपनाई जा सकती है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पर्व को श्रद्धा और पारिवारिक सम्मान के साथ मनाया जाए। करवा चौथ केवल उपवास का नहीं, बल्कि परिवार के रिश्तों को मजबूत बनाने का भी अवसर है।
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