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धर्म-अध्यात्म
भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सावन में करें ये खास उपाय, मिलेगा आशीर्वाद
jantaserishta.com
10 July 2025 10:08 AM IST

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नई दिल्ली: महादेव को प्रिय श्रावण मास का शुभारंभ शुक्रवार से हो रहा है, जिसे लेकर शिव भक्तों में उत्साह है। इस मास में भोलेनाथ की पूजा का विशेष महत्व है। यह महीना भगवान शिव की पूजा, आराधना के लिए विशेष माना गया है।
श्रावण मास में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाना, बिल्व पत्र अर्पित करना और रुद्राभिषेक करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
'सावन सोमवार का व्रत' हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर भगवान शिव के भक्तों के लिए। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और सोमवार का दिन उन्हें अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अविवाहित लड़कियों को मनपसंद वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाओं को सुखद वैवाहिक जीवन और संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है।
सोमवार के दिन भगवान शिव को गंगाजल, दूध, घी, शक्कर के साथ अबीर, इत्र, अक्षत (चावल के साबूत दाने) समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इसके साथ ही चीनी और दूध समेत सफेद चीजों का दान करना चाहिए। घर में या मंदिर में रुद्राभिषेक करने का भी विशेष प्रावधान है।
भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें, गंगाजल और दूध से अभिषेक करें, और बिल्वपत्र, चंदन, अक्षत, फल और फूल चढ़ाएं। लेकिन एकादशी के दिन भगवान शिव को अक्षत नहीं चढ़ाना चाहिए।
भोलेनाथ की पूजा के साथ ही माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। माता को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं। इसके साथ ही भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें और दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें। इसके बाद 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना चाहिए। व्रत के बाद, गरीबों, ब्राम्हणों के साथ ही जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।
उत्तर भारत में सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। वहीं, इस बात का विशेष ध्यान रहे कि भारत के कुछ क्षेत्रों, जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और गोवा जैसे दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में, अमांत कैलेंडर का पालन किया जाता है। जिस वजह से इन क्षेत्रों में सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू होगा और इसका समापन 23 अगस्त को होगा।
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