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स्मार्टफोन बाजार में महंगाई का खतरा, AI ने बढ़ाई मेमोरी चिप की मांग

nidhi
6 Nov 2026 9:40 AM IST
स्मार्टफोन बाजार में महंगाई का खतरा, AI ने बढ़ाई मेमोरी चिप की मांग
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नई दिल्ली: अगर आप आने वाले दिनों में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको अपनी जेब पहले से ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब स्मार्टफोन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण सस्ते स्मार्टफोन की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों और डेटा सेंटरों में मेमोरी चिप की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है। मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली रैम और स्टोरेज चिप महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ रही है।
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर बजट स्मार्टफोन पर पड़ने की आशंका जताई गई है। कम कीमत वाले स्मार्टफोन तैयार करने वाली कंपनियां पहले से ही सीमित मुनाफे पर काम करती हैं। ऐसे में जरूरी उपकरणों की कीमत बढ़ने पर कंपनियों के सामने मोबाइल की कीमत बढ़ाने या उसके फीचर्स में कटौती करने जैसी चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
AI के कारण क्यों महंगी हो रही हैं मेमोरी चिप?
दरअसल, AI तकनीक को विकसित करने और बड़े डेटा सेंटर चलाने के लिए अत्यधिक क्षमता वाली मेमोरी की जरूरत पड़ती है। दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां AI सर्वर और डेटा सेंटरों पर भारी निवेश कर रही हैं।
इस वजह से मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियां अधिक मुनाफे वाले हाई-बैंडविड्थ मेमोरी और सर्वर से जुड़े उत्पादों के निर्माण पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
इस बदलाव के कारण स्मार्टफोन और कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली सामान्य मेमोरी चिप की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। बाजार में मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होने से इनकी कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
₹10,000 वाला फोन हो सकता है ₹13,000 का
जेफरीज के अनुमान के अनुसार, कम कीमत वाले स्मार्टफोन में लगभग 30 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि की स्थिति बन सकती है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी बजट स्मार्टफोन की मौजूदा कीमत 10,000 रुपये है और उसमें 30 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है, तो उसकी कीमत लगभग 13,000 रुपये हो जाएगी।
इसी तरह 15,000 रुपये वाला फोन लगभग 19,500 रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि, यह केवल अनुमान के आधार पर की गई गणना है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियां अपने स्मार्टफोन की कीमतों में एक समान 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेंगी।
वास्तविक कीमतें कंपनी, मॉडल, मेमोरी क्षमता, बाजार की स्थिति और उत्पादन लागत पर निर्भर करेंगी।
स्मार्टफोन कंपनियों के सामने बढ़ी चुनौती
मेमोरी चिप महंगी होने के कारण मोबाइल निर्माता कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
कुछ कंपनियां स्मार्टफोन की कीमत बढ़ाकर अतिरिक्त लागत ग्राहकों से वसूल सकती हैं। वहीं, कुछ कंपनियां कीमत को नियंत्रित रखने के लिए पुराने प्रोसेसर या कम क्षमता वाली रैम और स्टोरेज का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे उपभोक्ताओं को एक ही कीमत में पहले के मुकाबले कम हार्डवेयर सुविधाएं मिलने की आशंका भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम कीमत वाले मोबाइल फोन के बाजार में यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इस श्रेणी के ग्राहक कीमतों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
पुराने और रिफर्बिश्ड फोन की बढ़ सकती है मांग
जेफरीज की रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि स्मार्टफोन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने पर ग्राहक नया फोन खरीदने का फैसला टाल सकते हैं। कुछ लोग अपने पुराने स्मार्टफोन का इस्तेमाल अधिक समय तक जारी रख सकते हैं। वहीं, कम बजट वाले ग्राहक सेकंड हैंड या रिफर्बिश्ड मोबाइल फोन की ओर रुख कर सकते हैं।
इससे नए स्मार्टफोन की बिक्री प्रभावित होने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, AI उद्योग में मेमोरी की मांग आने वाले समय में भी ऊंची बनी रह सकती है। इससे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली कंपनियों पर लागत का दबाव लंबे समय तक बना रहने की आशंका है।
2027 तक बने रह सकते हैं महंगी मेमोरी के हालात
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2027 में AI से जुड़ी गतिविधियां वैश्विक मेमोरी मांग का बड़ा हिस्सा बन सकती हैं। AI क्षेत्र में भारी निवेश से मेमोरी चिप की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। यदि उत्पादन क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी, तो स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों पर असर जारी रह सकता है। भारत जैसे बड़े और कीमत के प्रति संवेदनशील बाजार में इसका विशेष महत्व है। यहां बड़ी संख्या में ग्राहक किफायती स्मार्टफोन खरीदना पसंद करते हैं।
ऐसे में मोबाइल की कीमतों में बढ़ोतरी होने से नए स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल जेफरीज की रिपोर्ट एक संभावित मूल्य वृद्धि की चेतावनी देती है। स्मार्टफोन की कीमतों में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी को सभी ब्रांड और मॉडल के लिए निश्चित नहीं माना जा सकता। लेकिन इतना स्पष्ट है कि AI तकनीक के तेजी से विस्तार ने स्मार्टफोन उद्योग की लागत और आपूर्ति व्यवस्था पर नया दबाव पैदा कर दिया है। आने वाले समय में इसका असर कंपनियों की कीमतों और ग्राहकों के खरीदारी संबंधी फैसलों पर दिखाई दे सकता है।
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