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धर्म-अध्यात्म
Hanuman भक्तों के लिए वरदान है ये स्तोत्र! मंगलवार को पाठ, जाने विधि और लाभ
Tara Tandi
8 April 2025 12:57 PM IST

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Hanuman Stotra ज्योतिष न्यूज़ : वैदिक ज्योतिष के अनुसार सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होते हैं। जैसे सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, तो शनिवार शनिदेव को। इसी तरह मंगलवार हनुमान जी की पूजा के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के कार्यों में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा करने से वे बेहद प्रसन्न होते हैं और जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत होता है। इसके अलावा ज्योतिष के अनुसार अगर आप मंगलवार के दिन नियमित रूप से पाठ करते हैं तो इससे जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है। ऐसे में आइए यहां पढ़ते हैं मंगल ग्रह कवच और मंगल स्तोत्र का पाठ।
मंगल ग्रह कवच
धरासुतः शक्तिधरश्च शूली सदा ममस्याद्वरदः प्रशांतः ॥
अंगारकः शिरो रक्षेन्मुखं वै धरणीसुतः ।
श्रवौ रक्तांबरः पातु नेत्रे मे रक्तलोचनः ॥
नासां शक्तिधरः पातु मुखं मे रक्तलोचनः ।
भुजौ मे रक्तमाली च हस्तौ शक्तिधरस्तथा ॥
वक्षः पातु वरांगश्च हृदयं पातु लोहितः।
कटिं मे ग्रहराजश्च मुखं चैव धरासुतः ॥
जानुजंघे कुजः पातु पादौ भक्तप्रियः सदा ।
सर्वण्यन्यानि चांगानि रक्षेन्मे मेषवाहनः ॥
या इदं कवचं दिव्यं सर्वशत्रु निवारणम् ।
भूतप्रेतपिशाचानां नाशनं सर्व सिद्धिदम् ॥
सर्वरोगहरं चैव सर्वसंपत्प्रदं शुभम् ।
भुक्तिमुक्तिप्रदं नृणां सर्वसौभाग्यवर्धनम् ॥
रोगबंधविमोक्षं च सत्यमेतन्न संशयः ॥
मंगल स्तोत्र
धरणीगर्भसंभूतं विद्युतेजसमप्रभम ।
कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम ।।
ऋणहर्त्रे नमस्तुभ्यं दु:खदारिद्रनाशिने ।
नमामि द्योतमानाय सर्वकल्याणकारिणे ।।
देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसपन्नगा: ।
सुखं यान्ति यतस्तस्मै नमो धरणि सूनवे ।।
यो वक्रगतिमापन्नो नृणां विघ्नं प्रयच्छति ।
पूजित: सुखसौभाग्यं तस्मै क्ष्मासूनवे नम:।।
प्रसादं कुरु मे नाथ मंगलप्रद मंगल ।
मेषवाहन रुद्रात्मन पुत्रान देहि धनं यश:।।
मंगल वैदिक मंत्र
ऊँ अग्निमूर्धादिव: ककुत्पति: पृथिव्यअयम अपा रेता सिजिन्नवति।
मंगल तांत्रिक मंत्र
ऊँ हां हंस: खं ख:
ऊँ हूं श्रीं मंगलाय नम:
ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:
मंगल एकाक्षरी बीज मंत्र
ऊँ अं अंगारकाय नम:
ऊँ भौं भौमाय नम:।।
मंगल ग्रह मंत्र
ऊँ धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम ।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम ।।
मंगल गायत्री मंत्र
ॐ अंगारकाय विद्महे शक्ति हस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।।
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