धर्म-अध्यात्म

विनायक चतुर्थी के दिन जरूर सुने ये कथा हर होगी मनोकामना

Teja
6 Jan 2022 5:45 AM GMT
विनायक चतुर्थी के दिन जरूर सुने ये कथा हर होगी मनोकामना
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पूजा के समय विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vrat Katha) सुनी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आप जो भी व्रत रखते हैं,

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | पौष मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है. विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2022) के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है. विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखा जाता है और गणेश जी की आराधना की जाती है. पूजा के समय विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vrat Katha) सुनी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आप जो भी व्रत रखते हैं, उसकी व्रत कथा सुननी चाहिए. आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी की कथाToday's Panchang 6 January 2021: वरद चतुर्थी आज, इस शुभ मुहूर्त पर करें भगवान गणेश की पूजा, पढ़ें पंचांग

विनायक चतुर्थी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है. राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार था. वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए मिट्टी के बर्तन बनाता था. किसी कारणवश उसके बर्तन सही से आग में पकते नहीं थे और वे कच्चे रह जाते थे. अब मिट्टी के कच्चे बर्तनों के कारण उसकी आमदनी कम होने लगी क्योंकि उसके खरीदार कम मिलते थे. Also Read - Varad Chaturthi 2022: जानें कब मनाई जाएगी वरद चतुर्थी, इस दिन करें गणेश स्तुति का पाठ, पूरी होगी हर ख्वाहिश
इस समस्या के समाधान के लिए वह एक पुजारी के पास गया. पुजारी ने कहा कि इसके लिए तुमको बर्तनों के साथ आंवा में एक छोटे बालक को डाल देना चाहिए. पुजारी की सलाह पर उसने अपने मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए आंवा में रखा और उसके साथ एक बालक को भी रख दिया.
उस दिन संकष्टी चतुर्थी थी. बालक के न मिलने से उसकी मां परेशान हो गई. उसने गणेश जी से उसकी कुशलता के लिए प्रार्थना की. उधर कुम्हार अगले दिन सुबह अपने मिट्टी के बर्तनों को देखा कि सभी अच्छे से पक गए हैं और वह बालक भी जीवित था. उसे कुछ नहीं हुआ था. यह देखकर वह कुम्हार डर गया और राजा के दरबार में गया. उसने सारी बात बताई. फिर राजा ने उस बालक और उसकी माता को दरबार में बुलाया. तब उस महिला ने गणेश चतुर्थी व्रत के महात्म का वर्णन किया.


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