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धर्म : सावन का महीना भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आराधना के लिए भी विशेष माना जाता है। सावन के प्रत्येक मंगलवार को **मंगला गौरी व्रत** रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत माता गौरी को समर्पित है और विशेष रूप से वैवाहिक सुख, अखंड सौभाग्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। सावन के मंगलवार को श्रद्धालु विधि-विधान से माता पार्वती की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
मंगला गौरी व्रत में पूजा के साथ कुछ पारंपरिक उपाय भी किए जाते हैं। इन्हीं में माता गौरी को **16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने** की परंपरा प्रमुख है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ यह उपाय करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार में सुख, सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। हालांकि धन बढ़ने जैसी बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित मान्यताएं हैं, इन्हें सुनिश्चित आर्थिक परिणाम के रूप में नहीं देखना चाहिए।
क्या है मंगला गौरी व्रत?
मंगला गौरी व्रत सावन के मंगलवार को रखा जाता है। माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में माता गौरी को सौभाग्य, वैवाहिक सुख और पारिवारिक समृद्धि की देवी माना गया है।
विशेष रूप से विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां अच्छे जीवनसाथी और विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की कामना से माता गौरी की पूजा करती हैं।
पुरुष भी परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना से माता गौरी की आराधना कर सकते हैं।
करें 16 श्रृंगार अर्पित करने का उपाय
मंगला गौरी व्रत के दिन माता पार्वती को **सोलह श्रृंगार की सामग्री** अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसमें सिंदूर, मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, काजल, कंघी और अन्य श्रृंगार सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार शामिल की जा सकती है।
पूजा के दौरान माता गौरी के सामने ये वस्तुएं रखकर परिवार के सुख, दांपत्य जीवन में प्रेम और आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। पूजा पूरी होने के बाद श्रृंगार की सामग्री किसी सुहागिन महिला को दान करने की भी परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
धन-समृद्धि के लिए ऐसे करें पूजा
मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान को साफ करके माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करें।
इसके बाद माता गौरी को फूल, फल, अक्षत, रोली, कुमकुम और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जा सकता है।
पूजा के दौरान **'ॐ गौरीशंकराय नमः'** या माता गौरी के किसी प्रचलित मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है। इसके बाद माता से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।
भगवान शिव की पूजा भी मानी जाती है शुभ
माता पार्वती की पूजा भगवान शिव के बिना अधूरी मानी जाती है। इसलिए मंगला गौरी व्रत के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने और भगवान शिव का ध्यान करने की परंपरा भी है।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में मंगलवार को शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा दांपत्य जीवन के लिए शुभ मानी जाती है।
श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और फूल अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद माता पार्वती से अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।
सुहागिन महिलाओं को दें ये चीजें
धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंगला गौरी व्रत के दिन किसी जरूरतमंद या सुहागिन महिला को वस्त्र, फल या श्रृंगार सामग्री देना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है।
दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और जरूरतमंद की सहायता को महत्व देना बेहतर माना जाता है।
व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
मंगला गौरी व्रत में पूजा के साथ सात्विक आचरण का भी महत्व बताया गया है। व्रती को क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने का प्रयास करना चाहिए। दिनभर माता गौरी और भगवान शिव का स्मरण किया जाता है।
व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। जिन लोगों के लिए उपवास करना संभव नहीं है, वे बिना उपवास के भी श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं।
आस्था से जुड़ा है धन-सौभाग्य का उपाय
माता गौरी को 16 श्रृंगार अर्पित करने और बाद में उसका दान करने की परंपरा को सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
हालांकि किसी धार्मिक उपाय से धन मिलने या आर्थिक स्थिति में निश्चित बदलाव होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे आस्था और धार्मिक परंपरा के रूप में ही अपनाना उचित है।
मंगला गौरी व्रत का मूल संदेश शिव-पार्वती की आराधना, परिवार के कल्याण की कामना, संयम और दान से जुड़ा है। श्रद्धा के साथ पूजा और जरूरतमंद की सहायता करना इस दिन को और सार्थक बना सकता है।
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