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धर्म-अध्यात्म
मोती धारण करने की सोच रहे हैं पहले जान लें ये जरूरी नियम
Ratna Netam
25 Sept 2026 4:06 PM IST

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धर्म : रत्नशास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं में मोती को विशेष स्थान दिया गया है। अपनी सफेद चमक और खूबसूरती के कारण मोती का इस्तेमाल आभूषणों में लंबे समय से होता आया है। ज्योतिष में इसे चंद्रमा से संबंधित रत्न माना जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक शांति का कारक है, इसलिए कुछ ज्योतिषीय परिस्थितियों में मोती पहनने की सलाह दी जाती है। हालांकि रत्न धारण करने से जुड़े ये प्रभाव पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार नहीं हैं। इसलिए मोती पहनने से पहले जन्मकुंडली के आधार पर उचित सलाह लेने की परंपरा है।मोती दिखने में बेहद आकर्षक होता है और इसे अंगूठी, पेंडेंट या अन्य आभूषणों के रूप में पहना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक हर व्यक्ति को केवल पसंद के आधार पर मोती नहीं पहनना चाहिए। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति और दूसरे ग्रहों के साथ उसके संबंध को देखकर ही इसे धारण करने की सलाह दी जाती है।
मोती कब पहनने की दी जाती है सलाह
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की जन्मकुंडली में चंद्रमा कमजोर माना जाता है, उन्हें ज्योतिषी मोती पहनने की सलाह दे सकते हैं। चंद्रमा को मन और भावनात्मक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से पारंपरिक मान्यता है कि उचित परिस्थितियों में मोती पहनने से मन की शांति और भावनात्मक संतुलन से जुड़े सकारात्मक प्रभाव मिल सकते हैं।हालांकि केवल तनाव, बेचैनी या नींद जैसी समस्याओं को देखकर खुद से मोती पहनने का फैसला नहीं करना चाहिए। ऐसी समस्याओं के स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं, जिनके लिए जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। रत्न को किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
पहली बात- कुंडली देखकर करें फैसला
मोती पहनने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात जन्मकुंडली देखना मानी जाती है। ज्योतिष में केवल चंद्रमा कमजोर होने की सामान्य धारणा के आधार पर रत्न नहीं चुना जाता, बल्कि उसकी राशि, भाव, दृष्टि और अन्य ग्रहों के साथ संबंध जैसी स्थितियों को भी देखा जाता है।यही वजह है कि किसी दूसरे व्यक्ति को मोती पहनने से लाभ होने की बात सुनकर स्वयं भी वही रत्न पहन लेना सही नहीं माना जाता। एक ही रत्न का चुनाव अलग-अलग जन्मकुंडलियों में अलग तरीके से किया जाता है। इसलिए ज्योतिषीय उद्देश्य से मोती पहन रहे हैं तो व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
दूसरी बात- असली और अच्छी गुणवत्ता का मोती चुनें
अगर मोती आभूषण के बजाय ज्योतिषीय उद्देश्य से खरीदा जा रहा है, तो उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। बाजार में प्राकृतिक, कल्चर्ड और नकली मोती सहित कई तरह के विकल्प मिलते हैं। केवल चमक देखकर किसी मोती को प्राकृतिक मान लेना सही नहीं है।महंगा रत्न खरीदते समय विश्वसनीय विक्रेता से बिल और उपलब्ध प्रमाणपत्र लेना उपयोगी हो सकता है। रत्न की प्रामाणिकता को लेकर संदेह हो तो किसी मान्यता प्राप्त जेमोलॉजिकल लैब से जांच कराई जा सकती है। इससे नकली या गलत तरीके से बेचे जा रहे उत्पाद से बचने में मदद मिल सकती है।
तीसरी बात- दिन और समय का रखें ध्यान
पारंपरिक ज्योतिष में मोती को चंद्रमा का रत्न मानते हुए इसे सोमवार से जोड़ा जाता है। कई ज्योतिषीय परंपराओं में सोमवार को मोती धारण करने की सलाह दी जाती है। इसे पहनने से पहले पूजा, शुद्धिकरण या मंत्र जाप जैसी अलग-अलग परंपराएं भी प्रचलित हैं।हालांकि धारण करने का समय, अंगुली, धातु और रत्न का वजन जैसी सलाह विभिन्न ज्योतिषीय परंपराओं और व्यक्ति की कुंडली के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए सभी लोगों के लिए एक ही नियम मानने के बजाय व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
चौथी बात- धातु और पहनने का तरीका
मोती को आमतौर पर चांदी के साथ पहनने की परंपरा काफी प्रचलित है। कई लोग इसे अंगूठी के रूप में पहनते हैं, जबकि कुछ लोग पेंडेंट के रूप में धारण करना पसंद करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में अंगूठी पहनने के लिए किस अंगुली का चुनाव किया जाए, इसे लेकर भी अलग-अलग परंपराएं हैं।अगर आप केवल फैशन और ज्वेलरी के तौर पर मोती पहन रहे हैं, तो इन ज्योतिषीय नियमों का पालन करना जरूरी नहीं है। लेकिन ज्योतिषीय लाभ की मान्यता के आधार पर पहन रहे हैं तो रत्न, धातु और धारण करने की विधि को अपनी कुंडली के अनुसार तय किया जा सकता है।मोती बेहद खूबसूरत रत्न है, लेकिन ज्योतिषीय उद्देश्य से इसे पहनने का फैसला सोच-समझकर करना चाहिए। कुंडली की स्थिति समझना, रत्न की गुणवत्ता जांचना, सही समय की जानकारी लेना और पहनने की उचित विधि जानना चार महत्वपूर्ण बातें मानी जाती हैं। साथ ही यह याद रखना जरूरी है कि रत्नशास्त्र से जुड़े लाभ धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं का हिस्सा हैं। स्वास्थ्य, मानसिक तनाव या अन्य चिकित्सकीय समस्या होने पर रत्न पर निर्भर रहने के बजाय योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा जरूरी है।
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