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धर्म-अध्यात्म
नवरात्र में शुभ माने जाते हैं ये पौधे, जानें धार्मिक महत्व
nidhi
13 Oct 2026 10:19 AM IST

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मां दुर्गा की पूजा से जुड़े पौधे
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ शुभ कार्य करने की परंपरा है। कई परिवार इस दौरान घर में पौधे लगाते हैं और उनकी देखभाल का संकल्प लेते हैं। धार्मिक तथा वास्तु मान्यताओं में गुड़हल, तुलसी, हरसिंगार, शमी और अपराजिता जैसे पौधों को शुभ माना जाता है। इनका संबंध पूजा, मंगलकामना और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। हालांकि, पौधा लगाने से समृद्धि मिलने की बातें धार्मिक विश्वास हैं, निश्चित परिणाम का दावा नहीं।
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई है। सामान्य दशहरा कैलेंडर के अनुसार विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस अवधि में अपनी आस्था के अनुसार पौधा लगाने वाले लोग उसकी जरूरत, उपलब्ध जगह और देखभाल की सुविधा देखकर चुनाव कर सकते हैं। सभी पौधे लगाना जरूरी नहीं है; एक पौधे को उचित स्थान देकर नियमित देखभाल करना भी हरियाली बढ़ाने का अच्छा प्रयास है।
गुड़हल का लाल फूल देवी की पूजा में विशेष स्थान रखता है। धार्मिक परंपरा में इसे मां दुर्गा को प्रिय माना जाता है। इसी कारण नवरात्र में गुड़हल का पौधा लगाने को शुभ कार्य के रूप में देखा जाता है। वास्तु मान्यताओं में इसके लिए पूर्व या उत्तर दिशा बताई जाती है। पौधे का चुनाव करते समय फूल के रंग के साथ यह देखना भी उपयोगी है कि उसे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी या नहीं।
पारिजात को हरसिंगार भी कहा जाता है। इसके फूलों का उपयोग देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस पौधे को शुभता से जोड़ा गया है। वास्तु परंपरा के अनुसार इसे उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने की सलाह दी जाती है। घर के आंगन में इसे लगाते समय भविष्य में इसके आकार और आसपास उपलब्ध स्थान का ध्यान रखना चाहिए।
तुलसी हिंदू परंपरा में पवित्र मानी जाती है और अनेक घरों में इसकी नियमित पूजा होती है। धार्मिक विश्वास में इसे माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। घर में तुलसी लगाने को सुख-शांति की कामना का प्रतीक माना जाता है। वास्तु मान्यताओं में उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा का उल्लेख मिलता है। तुलसी की पूजा और देवी को अर्पित की जाने वाली सामग्री की परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने परिवार की प्रचलित रीति का पालन करें।
शमी का पौधा भी धार्मिक महत्व रखता है। इसे भगवान शिव और देवी की उपासना से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु परंपरा में शमी को दक्षिण या पश्चिम दिशा, मुख्य द्वार के बाहर अथवा छत पर लगाने की सलाह मिलती है। संकट दूर होने और शुभता बढ़ने के दावे आस्था का हिस्सा हैं।
अपराजिता के नीले या सफेद फूल भी पूजा में अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें देवी की आराधना और मंगलकामना से जोड़ा जाता है। वास्तु परंपरा में अपराजिता के लिए उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा बताई जाती है। पौधे को लगाने के साथ उसके स्वस्थ विकास पर ध्यान देना जरूरी है।
पौधा खरीदते समय स्वस्थ पत्तियों और अच्छी स्थिति वाली जड़ों को प्राथमिकता दें। गमले में पानी निकलने की व्यवस्था होनी चाहिए। पानी की मात्रा सभी पौधों के लिए एक जैसी नहीं होती, इसलिए मिट्टी की नमी और पौधे की जरूरत देखकर पानी दें। केवल धार्मिक दिशा देखकर ऐसी जगह पौधा न रखें जहां उसे आवश्यक रोशनी ही न मिले।
नवरात्र में पौधरोपण को आस्था के साथ प्रकृति की देखभाल से भी जोड़ा जा सकता है। पौधे को नियमित समय देना, सूखी पत्तियां हटाना और जरूरत के अनुसार स्थान बदलना उसकी देखभाल का हिस्सा है। शुभ अवसर पर लगाया गया पौधा तभी लंबे समय तक हरियाली देगा, जब उसकी जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा।
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