धर्म-अध्यात्म

एकादशी व्रत में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, जानें धार्मिक मान्यताएं

nidhi
6 Oct 2026 8:41 AM IST
एकादशी व्रत में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, जानें धार्मिक मान्यताएं
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इंदिरा एकादशी पर रखें इन 4 बातों का ध्यान
इंदिरा एकादशी को हिंदू धर्म में पितरों की शांति और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ा विशेष व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा, संयम और सात्विक आचरण का खास महत्व होता है। ऐसे में कुछ काम ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें इंदिरा एकादशी के दिन करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि पूर्वजों का आशीर्वाद “छिन जाने” जैसी बातें धार्मिक मान्यताओं और लोकविश्वास का हिस्सा हैं, इन्हें निश्चित परिणाम की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
1. तामसिक भोजन से बचें
इंदिरा एकादशी के दिन मांसाहार, शराब, प्याज-लहसुन और बहुत अधिक तामसिक भोजन से बचने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग आमतौर पर फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन खानपान जितना सरल और सात्विक रखा जाए, उतना बेहतर माना जाता है।
2. क्रोध और अपशब्द से दूरी रखें
धार्मिक परंपराओं में एकादशी के दिन केवल उपवास ही नहीं, बल्कि मन और वाणी पर नियंत्रण को भी महत्वपूर्ण माना गया है। किसी से झगड़ा करना, अपमान करना, कटु वचन बोलना या अनावश्यक क्रोध करना व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है।
3. पितरों का अनादर न करें
इंदिरा एकादशी का संबंध पितृ स्मरण से भी जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन पूर्वजों को श्रद्धा से याद करने, उनके नाम से दान-पुण्य करने और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के प्रति उपेक्षा या अनादर से बचना चाहिए।
4. व्रत में दिखावा या गलत आचरण न करें
अगर कोई व्यक्ति व्रत रख रहा है तो केवल भोजन न करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। छल, झूठ, दिखावा, दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाली सोच या गलत व्यवहार से बचना भी जरूरी बताया गया है। व्रत का उद्देश्य आत्मसंयम और मन की शुद्धि माना जाता है।
इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी अर्पण, विष्णु मंत्रों का जाप और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है। कई परिवार पितरों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना भी करते हैं।
व्रत करने वालों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान जरूर रखना चाहिए। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए कठोर उपवास जरूरी नहीं है। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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