धर्म-अध्यात्म

पिंडदान के लिए प्रसिद्ध हैं ये पवित्र घाट, जानें पहुंचने से लेकर पूजा तक की डिटेल

nidhi
28 Sept 2026 9:13 AM IST
पिंडदान के लिए प्रसिद्ध हैं ये पवित्र घाट, जानें पहुंचने से लेकर पूजा तक की डिटेल
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पितरों की शांति के लिए खास हैं ये तीर्थ स्थल
नई दिल्ली: पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान पितरों का स्मरण कर विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। बिहार का गया धाम पिंडदान के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है, लेकिन इसके अलावा आसपास के कई अन्य धार्मिक स्थल भी पिंडदान और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
1. गया विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी घाट
बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर पिंडदान के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां भगवान विष्णु के चरण चिह्न की पूजा की जाती है। फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पितृ पक्ष के दौरान गया में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
2. पुनपुन घाट
पटना के पास स्थित पुनपुन नदी घाट को भी पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कई श्रद्धालु गया जाने से पहले या अलग से यहां तर्पण करते हैं। यह स्थान पटना से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
3. वाराणसी के घाट
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा घाटों का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और अन्य घाटों पर लोग पितरों के लिए तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। गंगा किनारे श्राद्ध कर्म करने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।
4. प्रयागराज संगम
प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम को पवित्र माना जाता है। यहां भी पितरों के निमित्त तर्पण और पूजा की जाती है। संगम क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष व्यवस्था रहती है।
5. हरिद्वार के गंगा घाट
हरिद्वार में हर की पौड़ी सहित कई घाटों पर लोग पितरों के लिए पूजा और तर्पण करते हैं। गंगा स्नान और श्राद्ध कर्म के लिए यह स्थान भी श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय है।
यात्रा गाइड
गया जाने के लिए: गया रेलवे स्टेशन और गया एयरपोर्ट प्रमुख विकल्प हैं।
ठहरने की सुविधा: पितृ पक्ष के दौरान गया में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए पहले से व्यवस्था करना बेहतर रहता है।
पूजा सामग्री: स्थानीय पंडा समाज और धार्मिक स्थलों के आसपास पूजा सामग्री उपलब्ध रहती है।
समय: श्राद्ध कर्म के लिए सुबह का समय अधिक उपयुक्त माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया श्राद्ध कर्म पूर्वजों के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराओं में अंतर हो सकता है, इसलिए परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कर्म करना उचित माना जाता है।
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