धर्म-अध्यात्म

करवा चौथ पर इन 6 महिलाओं को निर्जला व्रत से बचना चाहिए, जानें वजह

Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 1:16 PM IST
करवा चौथ पर इन 6 महिलाओं को निर्जला व्रत से बचना चाहिए, जानें वजह
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Karwa Chauth: करवा चौथ का त्योहार विवाहित महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, कई महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक बिना पानी और भोजन के निर्जला उपवास करती हैं। हालांकि, धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से कुछ महिलाओं में डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर आना, ब्लड शुगर कम होना और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। खासकर पहले से किसी बीमारी से जूझ रही महिलाओं के लिए निर्जला व्रत जोखिम भरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि किन छह स्थितियों में महिलाओं को निर्जला उपवास से बचना चाहिए।
1. गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत से बचना चाहिए
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पोषण और पर्याप्त तरल पदार्थों की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
निर्जला व्रत रखने से गर्भवती महिलाओं में पानी की कमी, कमजोरी, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।विशेष रूप से जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला उपवास नहीं रखने की सलाह देते हैं। धार्मिक परंपरा निभाने के लिए सुरक्षित विकल्पों पर परिवार और चिकित्सक से चर्चा की जा सकती है।
2. डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं के लिए खतरा
जिन महिलाओं को डायबिटीज है, उनके लिए लंबे समय तक भूखे रहना और पानी नहीं पीना नुकसानदायक हो सकता है।विशेष रूप से इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली कुछ दवाइयां लेने वाली महिलाओं में उपवास के दौरान हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर अत्यधिक कम होने का खतरा बढ़ सकता है।इसके लक्षणों में अचानक पसीना आना, हाथ कांपना, घबराहट, कमजोरी, चक्कर और भ्रम की स्थिति शामिल हो सकती है।दूसरी ओर, कुछ महिलाओं में ब्लड शुगर बढ़ने और डिहाइड्रेशन का खतरा भी हो सकता है।डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। दवाइयों की मात्रा या समय में खुद से बदलाव नहीं करना चाहिए।
3. किडनी की बीमारी वाली महिलाओं को सावधानी जरूरी
किडनी से जुड़ी बीमारी से पीड़ित महिलाओं के लिए निर्जला व्रत जोखिम भरा हो सकता है। किडनी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।लंबे समय तक पानी नहीं पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जो कुछ परिस्थितियों में किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।जिन महिलाओं को क्रॉनिक किडनी डिजीज, बार-बार किडनी स्टोन बनने की समस्या या पहले से किडनी की कार्यक्षमता कम होने की शिकायत है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।हालांकि, किडनी रोगियों की तरल पदार्थ संबंधी जरूरतें अलग-अलग होती हैं। कुछ मरीजों को पानी सीमित मात्रा में पीने की सलाह भी दी जाती है।इसलिए किडनी की बीमारी वाली महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
4. लो ब्लड प्रेशर और बार-बार चक्कर आने वाली महिलाएं
जिन महिलाओं का ब्लड प्रेशर सामान्य से कम रहता है या जिन्हें बार-बार चक्कर और बेहोशी की शिकायत होती है, उनके लिए लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना परेशानी बढ़ा सकता है।निर्जला उपवास के दौरान शरीर में तरल पदार्थों की कमी होने से कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर और गिर सकता है।इसके कारण कमजोरी, आंखों के सामने अंधेरा छाना, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।जिन महिलाओं को पहले से लो ब्लड प्रेशर की समस्या है या जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाइयां लेती हैं, उन्हें उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
5. स्तनपान कराने वाली महिलाओं को रखना चाहिए विशेष ध्यान
बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं के शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और तरल पदार्थों की जरूरत होती है।विशेष रूप से प्रसव के शुरुआती महीनों में बच्चे के पोषण के लिए नियमित स्तनपान महत्वपूर्ण होता है।लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से मां में थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में दूध की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।हालांकि, हर महिला पर उपवास का प्रभाव एक जैसा नहीं होता।स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और बच्चे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
6. गंभीर एनीमिया या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाली महिलाएं
जिन महिलाओं को गंभीर एनीमिया यानी खून की कमी है, उन्हें लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहने पर कमजोरी या चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।इसके अलावा जिन महिलाओं को बार-बार माइग्रेन, गंभीर एसिडिटी, हाल में हुई सर्जरी या ऐसी बीमारी है जिसमें नियमित भोजन और दवाइयां जरूरी हैं, उनके लिए भी निर्जला उपवास उचित नहीं हो सकता।ऐसी महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।यदि डॉक्टर ने नियमित अंतराल पर भोजन करने या दवा के साथ पानी पीने की सलाह दी है, तो धार्मिक उपवास के लिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
व्रत के दौरान दिखाई दें ये लक्षण तो तुरंत ध्यान दें
अगर उपवास के दौरान अत्यधिक चक्कर, बेहोशी, भ्रम, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या गंभीर कमजोरी महसूस हो, तो व्रत तुरंत तोड़कर आवश्यक भोजन या पानी लेना चाहिए और चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करनी चाहिए।डायबिटीज वाली महिलाओं में ब्लड शुगर कम होने के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल उपचार जरूरी हो सकता है।स्वास्थ्य को खतरे में डालकर उपवास जारी रखना उचित नहीं है।
करवा चौथ पर सेहत का कैसे रखें ध्यान?
जो महिलाएं स्वस्थ हैं और व्रत रखने की योजना बना रही हैं, उन्हें भी अपने शरीर की जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए।व्रत से पहले पौष्टिक भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और अत्यधिक नमकीन भोजन से बचना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, पहले से पानी पी लेने से पूरे दिन निर्जला रहने का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता।व्रत खोलते समय पानी और हल्का भोजन धीरे-धीरे लेना बेहतर रहता है। एक साथ अत्यधिक भारी भोजन करने से पेट में परेशानी हो सकती है।यदि किसी महिला को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो वह अपनी आस्था के अनुसार बिना निर्जला उपवास के पूजा करने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है।
आस्था के साथ सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी
करवा चौथ प्रेम, विश्वास और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा पर्व है। लेकिन हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए किसी दूसरी महिला को देखकर उपवास रखने का निर्णय नहीं लेना चाहिए।गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज या किडनी रोग से पीड़ित महिलाएं, लो ब्लड प्रेशर वाली महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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