धर्म-अध्यात्म

काली चौदस पर इन 4 परंपराओं का है विशेष महत्व

nidhi
5 Nov 2026 11:42 AM IST
काली चौदस पर इन 4 परंपराओं का है विशेष महत्व
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धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में दिवाली से पहले मनाई जाने वाली काली चौदस का विशेष धार्मिक महत्व है। गुजरात में इस पर्व को श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। काली चौदस को नरक चतुर्दशी से संबंधित पर्व माना जाता है, लेकिन गुजरात में इसका विशेष संबंध माता काली और भगवान हनुमान की आराधना से भी है। इस वर्ष काली चौदस शनिवार, 7 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। गुजराती पंचांग के अनुसार, यह पर्व आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा-पाठ और विशेष अनुष्ठान करने से नकारात्मकता दूर होती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
गुजरात में काली चौदस पर चार प्रमुख परंपराओं का विशेष महत्व माना जाता है।
1. अभ्यंग स्नान की परंपरा
काली चौदस पर अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इस परंपरा में शरीर पर तेल लगाकर और उबटन का प्रयोग करके स्नान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से शरीर और मन की शुद्धि होती है। कुछ परिवारों में सूर्योदय से पहले स्नान करने की परंपरा है। अभ्यंग स्नान को स्वच्छता और स्वास्थ्य से जोड़कर भी देखा जाता है। हालांकि, इससे धार्मिक रूप से बताए जाने वाले विशेष फल मिलने की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
2. मां काली की विशेष पूजा
गुजरात में काली चौदस के अवसर पर माता काली की आराधना को महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु मां काली के सामने दीपक जलाते हैं और फूल तथा प्रसाद अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि माता काली की पूजा से भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। कुछ परिवारों में रात्रि के समय विशेष पूजा करने की परंपरा भी है। इस दौरान श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना करते हैं।
3. भगवान हनुमान की आराधना
काली चौदस पर गुजरात के कई क्षेत्रों में भगवान हनुमान की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि भगवान हनुमान की आराधना करने से साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। श्रद्धालु हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। कुछ लोग हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करते हैं और दीपक जलाते हैं। इस दिन माता काली और हनुमान जी की पूजा को नकारात्मकता से रक्षा की धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है।
4. घर में दीपक जलाने की परंपरा
काली चौदस पर दीपदान करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई परिवार अपने घर के प्रवेश द्वार और पूजा स्थान पर दीपक जलाते हैं। दीपक को अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कुछ स्थानों पर इस दिन घर की विशेष साफ-सफाई करने और दिवाली की तैयारियों को अंतिम रूप देने की भी परंपरा है।
काली चौदस का धार्मिक महत्व
काली चौदस को बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व दिवाली के प्रमुख उत्सव से पहले मनाया जाता है। गुजरात में इसके बाद लक्ष्मी पूजा और गुजराती नववर्ष जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं। काली चौदस की पूजा-पद्धति और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। श्रद्धालु स्थानीय परंपराओं और पंचांग के अनुसार पूजा करते हैं।
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