धर्म-अध्यात्म

भाद्रपद मास में ये 4 गलतियां पड़ सकती हैं भारी जानें धार्मिक नियम

nidhi
2 Sept 2026 1:56 PM IST
भाद्रपद मास में ये 4 गलतियां पड़ सकती हैं भारी जानें धार्मिक नियम
x
भाद्रपद में पूजा

धर्म : हिंदू पंचांग में भाद्रपद मास का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे आम बोलचाल में भादो का महीना भी कहा जाता है। उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार साल 2026 में भाद्रपद मास 29 अगस्त से 26 सितंबर तक रहेगा। इसी महीने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी और अनंत चतुर्दशी जैसे प्रमुख व्रत-पर्व आते हैं। धार्मिक परंपराओं में इस अवधि को पूजा-पाठ, जप, तप और संयम के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

1. पूजा में स्वच्छता की अनदेखी न करें
भाद्रपद में पूजा करते समय पहली महत्वपूर्ण बात शारीरिक और पूजा स्थल की स्वच्छता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनने और पूजा स्थान को स्वच्छ रखने के बाद ही आराधना करनी चाहिए। दीपक, धूप और नैवेद्य आदि भी साफ-सफाई के साथ अर्पित किए जाते हैं।
2. भगवान को तामसिक चीजों का भोग न लगाएं
भादो में सात्विक भोजन को प्राथमिकता देने की परंपरा है। इस दौरान भगवान को प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा जैसी तामसिक वस्तुएं अर्पित नहीं की जातीं। कई धार्मिक परंपराओं में श्रद्धालु स्वयं भी पूरे महीने इनसे दूरी रखते हैं। कुछ मान्यताओं में भाद्रपद के दौरान दही, गुड़ और बैंगन जैसी चीजों के सेवन से बचने का नियम भी बताया गया है। ये खान-पान संबंधी नियम अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में भिन्न हो सकते हैं।
3. प्रसाद का अनादर न करें
पूजा के दौरान भगवान को अर्पित किया गया प्रसाद धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इसलिए प्रसाद को गंदे स्थान पर रखने, फेंकने या उसका अनादर करने से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरत से ज्यादा प्रसाद होने पर उसे परिवार के सदस्यों या दूसरे लोगों में बांटा जा सकता है।
4. क्रोध और नकारात्मक व्यवहार से बचें
भाद्रपद मास को केवल पूजा-पाठ ही नहीं बल्कि मन और व्यवहार में संयम रखने का समय भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान झूठ बोलने, किसी की निंदा करने, बेवजह विवाद करने और क्रोध से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे उद्देश्य बाहरी पूजा के साथ मन को भी शांत और सात्विक रखना है।
श्रीकृष्ण और गणेशजी की आराधना का महत्व
भाद्रपद में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस महीने दान-पुण्य करने, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी अर्पित करने और मन में अच्छे विचार रखने को शुभ बताया गया है।
भाद्रपद चातुर्मास के भीतर आता है, इसलिए परंपरागत रूप से विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे कई मांगलिक संस्कार इस अवधि में नहीं किए जाते। हालांकि पूजा और खान-पान से जुड़े नियम क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं। ऐसे में अपने परिवार की धार्मिक परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।
Next Story