धर्म-अध्यात्म

चार महीने तक शादी-ब्याह पर विराम, जानें क्यों 20 नवंबर तक नहीं होंगे शुभ कार्य

nidhi
18 July 2026 7:35 AM IST
चार महीने तक शादी-ब्याह पर विराम, जानें क्यों 20 नवंबर तक नहीं होंगे शुभ कार्य
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25 जुलाई से 20 नवंबर तक शादियों और शुभ कार्यों पर लगेगा विराम, देवउठनी एकादशी के बाद फिर गूंजेंगी शहनाइयां
हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 25 जुलाई से चातुर्मास का आरंभ होने के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। यह अवधि 20 नवंबर तक रहेगी। इसके बाद देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता के साथ ही एक बार फिर शुभ कार्यों और विवाह समारोहों की शुरुआत होगी।
क्या है चातुर्मास?
चातुर्मास का अर्थ है चार महीनों की पवित्र अवधि। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को जागते हैं।
इसी अवधि के दौरान विवाह और अन्य मांगलिक संस्कार सामान्यतः नहीं किए जाते। यह समय पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ माना जाता है।
क्यों नहीं होते विवाह और शुभ कार्य?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, तब नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए इस अवधि में सामान्यतः—
विवाह
गृह प्रवेश
मुंडन संस्कार
यज्ञोपवीत (उपनयन)
नई संपत्ति से जुड़े कुछ शुभ संस्कार
जैसे कार्य स्थगित रखे जाते हैं।
हालांकि, स्थानीय परंपराओं, परिवार की मान्यताओं और विशेष परिस्थितियों में निर्णय अलग हो सकते हैं। विवाह या अन्य संस्कारों के लिए योग्य ज्योतिषाचार्य या पुरोहित से परामर्श लेना उचित रहता है।
देवउठनी एकादशी का महत्व
चातुर्मास समाप्त होने पर देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और इसके साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
इसी दिन कई स्थानों पर तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है, जिसे विवाह सीजन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
इन चार महीनों में क्या करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चातुर्मास में निम्न कार्य विशेष पुण्यदायी माने जाते हैं—
भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा
व्रत और उपवास
श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस और गीता का पाठ
दान-पुण्य और सेवा कार्य
सत्संग और भजन-कीर्तन
संयमित जीवनशैली का पालन
विवाह उद्योग पर भी पड़ता है असर
चातुर्मास शुरू होते ही विवाह समारोहों में स्वाभाविक रूप से कमी आ जाती है। इसका असर—
बैंक्वेट हॉल
होटल
कैटरिंग व्यवसाय
डेकोरेशन
बैंड-बाजा
ट्रैवल और इवेंट मैनेजमेंट
जैसे क्षेत्रों पर भी देखने को मिलता है। देवउठनी एकादशी के बाद फिर से विवाह सीजन शुरू होने पर इन व्यवसायों में तेजी आती है।
देवउठनी एकादशी के बाद लौटेगी रौनक
20 नवंबर के बाद देवउठनी एकादशी के अवसर पर मांगलिक कार्यों का शुभारंभ माना जाएगा। इसके बाद देशभर में विवाह समारोहों, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक आयोजनों की रौनक एक बार फिर देखने को मिलेगी। कई परिवार पहले से ही इस अवधि के बाद के शुभ मुहूर्तों के अनुसार अपनी तैयारियां शुरू कर देते हैं।
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