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धर्म-अध्यात्म
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर का अनोखा रहस्य सदियों से आस्था का केंद्र
nidhi
26 Aug 2026 9:05 AM IST

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काशी के इस शिव मंदिर में छिपा है बड़ा रहस्य
वाराणसी: काशी नगरी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। यहां मौजूद कई प्राचीन मंदिर अपनी मान्यताओं और रहस्यों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में से एक है काशी का तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर, जहां विराजमान स्वयंभू शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि यह हर साल तिल के बराबर बढ़ता है। यही कारण है कि यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर वाराणसी के भेलूपुर क्षेत्र में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था और हजारों वर्षों से इसकी पूजा की जा रही है।
हर साल तिल के बराबर बढ़ता है शिवलिंग
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां का स्वयंभू शिवलिंग है। मान्यता है कि शिवलिंग का आकार हर वर्ष एक तिल के बराबर बढ़ता है। इसी विशेषता के कारण इस मंदिर का नाम तिलभांडेश्वर पड़ा। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से यह शिवलिंग लगातार वृद्धि कर रहा है। हालांकि इस मान्यता का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन धार्मिक आस्था के कारण लाखों लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
ऋषि विभांड की तपस्या से जुड़ी मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान ऋषि विभांड की तपस्थली रहा है। कहा जाता है कि ऋषि विभांड यहां भगवान शिव की आराधना करते थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि यहां मौजूद शिवलिंग हर साल तिल के बराबर बढ़ता रहेगा। इसी मान्यता के कारण इस मंदिर को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। भक्त यहां जलाभिषेक कर भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
2500 साल पुराना माना जाता है शिवलिंग
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, तिलभांडेश्वर महादेव का शिवलिंग करीब 2500 वर्ष पुराना माना जाता है। मंदिर की प्राचीनता और इससे जुड़ी कथाएं इसे काशी के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल करती हैं। कहा जाता है कि पुराने समय में इस क्षेत्र में तिल की खेती होती थी और यहां प्रकट हुए शिवलिंग पर लोग तिल अर्पित करते थे। इसी वजह से इसका नाम तिलभांडेश्वर पड़ा, ऐसी भी एक मान्यता प्रचलित है।
महाशिवरात्रि और सावन में उमड़ती है भीड़
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त दूर-दूर से आकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। काशी के अन्य शिव मंदिरों की तरह यह मंदिर भी आस्था, परंपरा और धार्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता है।
आस्था और रहस्य का संगम
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था और रहस्य का संगम है। स्वयंभू शिवलिंग के बढ़ने की मान्यता इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है। काशी आने वाले श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ-साथ तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर भी जरूर पहुंचते हैं। यहां की प्राचीन मान्यताएं और आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को विशेष अनुभव प्रदान करते हैं।
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