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धर्म-अध्यात्म
12 Jyotirling दर्शन और पूजन का रहस्य, जानिए कैसे मिलेगा इच्छित वरदान
Tara Tandi
9 Jun 2025 1:04 PM IST

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12 Jyotirling ज्योतिष न्यूज़: भारत, एक ऐसा देश है जहां अध्यात्म और आस्था जीवन का अहम हिस्सा है। भगवान शिव, जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, त्रिनेत्रधारी और आशुतोष जैसे नामों से जाना जाता है, उनके बारह ज्योतिर्लिंग देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं। ये ज्योतिर्लिंग शिव के उस दिव्य प्रकाश-स्वरूप के प्रतीक हैं, जिनकी पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।अगर आप इन पवित्र धामों तक नहीं पहुंच सकते, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे भी भगवान शिव के इन बारह रूपों की सच्ची श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानें देश के किन-किन हिस्सों में स्थित हैं ये 12 ज्योतिर्लिंग और घर पर इनकी उपासना का तरीका क्या है।
महादेव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग कहां-कहां स्थित हैं?
सोमनाथ (गुजरात): यह पहला और सबसे प्राचीन ज्योतिर्लिंग माना जाता है। समुद्र के किनारे स्थित यह मंदिर साक्षात शिव की शक्ति का प्रतीक है।
मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश): इसे 'दक्षिण का कैलाश' कहा जाता है। यह शिव और पार्वती के साथ-साथ परिवार प्रेम का प्रतीक है।
महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश): काल पर विजय पाने वाले महाकाल की नगरी उज्जैन में यह ज्योतिर्लिंग स्थित है। यहां भस्म आरती प्रसिद्ध है।
ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश): यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीचों-बीच द्वीप पर स्थित है। इसे ओंकार ध्वनि का स्रोत माना जाता है।
केदारनाथ (उत्तराखंड): यह तीर्थ हिमालय की गोद में स्थित है और यहां पहुंचना कठिन लेकिन बेहद पुण्यदायी माना जाता है।
भीमाशंकर (महाराष्ट्र): सह्याद्रि की पहाड़ियों में स्थित यह मंदिर प्रकृति के बीच भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति को दर्शाता है।
काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): कहा जाता है कि काशी में मृत्यु भी मोक्ष देती है क्योंकि यहां शिव स्वयं मोक्षद्वार पर रहते हैं।
त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र): गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह शिवधाम त्रयंबक स्वरूप (तीनों नेत्रों वाले शिव) को समर्पित है।
वैद्यनाथ (देवघर, झारखंड): यह शिवजी के वैद्य रूप में प्रतिष्ठित है, जिनसे रोगमुक्ति की कामना की जाती है।
नागेश्वर (द्वारका, गुजरात): यह शिवधाम दुष्टों के संहार और भक्तों के रक्षक के रूप में पूजित है।
रामेश्वरम (तमिलनाडु): यहां भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व शिव की स्थापना की थी। यह रामभक्तों के लिए विशेष स्थान रखता है।
घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र): यह अंतिम ज्योतिर्लिंग एलोरा की गुफाओं के पास स्थित है और शिवभक्ति की गहराई को दर्शाता है।
घर में कैसे करें 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा?
अगर आप इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने में असमर्थ हैं, तो घर पर भी इनकी पूजा कर सकते हैं। घर पर पूजा करते समय ध्यान रखने योग्य प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
1. शिवलिंग का प्रतीकात्मक रूप रखें
घर में एक छोटा पारद, नर्मदेश्वर या क्रिस्टल शिवलिंग स्थापित करें। आप 12 ज्योतिर्लिंगों के चित्र भी मंदिर में रख सकते हैं।
2. पूजन का समय और विधि
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। शिवलिंग को जल, दूध, शहद, दही, घी और गंगाजल से स्नान कराएं (अभिषेक करें)।
3. 12 नामों का उच्चारण करें
ज्योतिर्लिंगों के नामों का जप करें:
"ओम नमः शिवाय, सोमनाथाय नमः, मल्लिकार्जुनाय नमः, महाकालाय नमः..."
इसी क्रम में सभी 12 नामों का ध्यान करें और दीप, धूप, बेलपत्र, भस्म, सफेद फूल अर्पित करें।
4. रुद्राष्टाध्यायी, शिव तांडव स्तोत्र या लघुरुद्र का पाठ करें
इन मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
5. विशेष संकल्प लें
आप किसी विशेष इच्छा पूर्ति के लिए संकल्प लें—जैसे नौकरी, विवाह, संतान, स्वास्थ्य या मानसिक शांति। शिव को भस्म, बेलपत्र, जल और शुद्ध मन बहुत प्रिय हैं।
कब करें विशेष पूजा?
सोमवार को शिव पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।श्रावण मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत या पूर्णिमा-अमावस्या पर भी ज्योतिर्लिंगों की पूजा घर पर करें।महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग सिर्फ तीर्थ नहीं हैं, ये आत्मा और परमात्मा के मिलन का मार्ग हैं। हर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी अपनी एक खास ऊर्जा है जो भक्त के मन और जीवन में आश्चर्यजनक बदलाव ला सकती है। यदि आप तीर्थ नहीं जा सकते तो चिंता न करें, आपकी सच्ची आस्था और श्रद्धा ही भगवान शिव तक पहुंचने का मार्ग है। घर पर विधिपूर्वक पूजा करें, और देखिए कैसे आपकी समस्याएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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