धर्म-अध्यात्म

कलावा बांधने की परंपरा का धार्मिक महत्व, रक्षासूत्र माना जाता है शुभ सुरक्षा कवच

Kavita2
15 May 2026 12:25 PM IST
कलावा बांधने की परंपरा का धार्मिक महत्व, रक्षासूत्र माना जाता है शुभ सुरक्षा कवच
x

Religion धर्म : हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान कलावा बांधने की परंपरा बेहद पुरानी और महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेष रूप से सावन माह, चातुर्मास और अन्य शुभ अवसरों पर श्रद्धालु अपने हाथ में कलावा (मौली) अवश्य बंधवाते हैं। इसे धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा केवल एक सामान्य धागा नहीं है, बल्कि इसे रक्षासूत्र के रूप में देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और अनचाही बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करता है। पूजा-पाठ के दौरान पंडित या पुरोहित मंत्रोच्चारण के साथ इसे बांधते हैं, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

परंपरागत रूप से कलावा को लाल और पीले रंग के धागों से बनाया जाता है, जिन्हें शुभता, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे दाहिने हाथ में पुरुषों और अविवाहित महिलाओं द्वारा तथा बाएं हाथ में विवाहित महिलाओं द्वारा बांधा जाता है, हालांकि यह परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न भी हो सकती है।

शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि कलावा बांधने से व्यक्ति के चारों ओर एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बनता है, जो उसे बुरी शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से दूर रखता है। इसके साथ ही इसे भगवान की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम भी माना जाता है।

सावन माह में शिव मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर कलावा बांधने की परंपरा विशेष रूप से देखने को मिलती है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की पूजा के बाद अपने हाथ में धारण करते हैं और इसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक मानते हैं।

धार्मिक जानकारों के अनुसार, कलावा केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। इसे बांधने से व्यक्ति में आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता बढ़ने की मान्यता भी प्रचलित है।

आज के समय में भी यह परंपरा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से निभाई जा रही है। धार्मिक आयोजनों, यज्ञों और मंदिरों में कलावा बांधने की परंपरा आज भी उतनी ही आस्था और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है जितनी प्राचीन समय में निभाई जाती थी।

इस प्रकार कलावा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक के रूप में स्थापित है, जो आस्था, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।

Next Story