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Religion Desk धर्म डेस्क : हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में सूक्ष्म ऊर्जा परिवर्तन होते हैं, जिसके चलते कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। ग्रहण लगने से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें पूजा-पाठ और कई सामान्य गतिविधियों पर विशेष प्रतिबंध माने जाते हैं।
वर्ष 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण इस बार धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ग्रहण श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगने जा रहा है। इसी दिन हरियाली अमावस्या भी मनाई जाएगी, जिससे इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन पितृ तर्पण, दान-पुण्य और विशेष पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं श्रावण मास शिवभक्ति का पवित्र समय माना जाता है, ऐसे में अमावस्या और सूर्य ग्रहण का एक साथ पड़ना इसे अत्यंत विशेष बना देता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-अर्चना रोक दी जाती है। इस अवधि में भोजन बनाने और ग्रहण करने से भी परहेज करने की परंपरा मानी जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान-पुण्य को शुभ माना जाता है।
हरियाली अमावस्या को प्रकृति और हरियाली से जोड़कर भी देखा जाता है, जिसमें वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों का विशेष महत्व होता है। ऐसे में जब यह तिथि सूर्य ग्रहण के साथ पड़ रही है, तो इसे धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से एक विशेष संयोग माना जा रहा है।
ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दुर्लभ संयोग जीवन में आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है।
इस प्रकार, 2026 का यह सूर्य ग्रहण धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय मान्यताओं और सांस्कृतिक उत्सवों के संगम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे इस दिन की महत्ता और भी बढ़ गई है।





