धर्म-अध्यात्म

नए साल 2026 की शुरुआत Guru Pradosh व्रत से, शिव पूजा से शनि-राहु के अशुभ प्रभाव होंगे कम

Harrison
23 Dec 2025 8:36 PM IST
नए साल 2026 की शुरुआत Guru Pradosh  व्रत से, शिव पूजा से शनि-राहु के अशुभ प्रभाव होंगे कम
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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : नया साल 2026 धार्मिक दृष्टि से खास संयोग के साथ शुरू हो रहा है। वर्ष के पहले दिन गुरु प्रदोष व्रत पड़ रहा है, जो भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत का दिन शिव कृपा पाने, ग्रह दोषों से राहत और मानसिक शांति के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह बृहस्पति देव से जुड़ा होता है, जिन्हें ज्ञान, धर्म और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस दिन की गई शिव आराधना से शनिदेव, राहु और केतु से जुड़े अशुभ प्रभावों में कमी आती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होती है, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर गंगाजल और काले तिल से अभिषेक करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। काले तिल को शनि से जुड़ा माना गया है और इसका प्रयोग शिव पूजा में करने से शनि के कठोर प्रभाव कम होते हैं। वहीं, राहु-केतु से जुड़ी परेशानियों से राहत पाने के लिए भी इस दिन शिव मंत्रों का जाप लाभकारी माना जाता है।
मानसिक तनाव, चिंता और अस्थिर मन से परेशान लोगों के लिए गुरु प्रदोष व्रत पर दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दूध से अभिषेक करने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक विचारों में कमी आती है। इसके साथ ही “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से मानसिक संतुलन मजबूत होता है।
आर्थिक समस्याओं और धन की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए भी गुरु प्रदोष व्रत को शुभ माना गया है। इस दिन तुलसी की पूजा करने से आर्थिक तंगी दूर होने के योग बनते हैं। मान्यता है कि तुलसी माता की पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और रुके हुए कार्यों में गति मिलती है। इसके साथ ही शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना भी धन संबंधी समस्याओं में राहत देने वाला माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। विशेष रूप से शनि से संबंधित वस्तुओं जैसे काले तिल, काले वस्त्र, लोहे की वस्तुएं या सरसों का तेल दान करने से शनि दोष में कमी आती है। दान हमेशा जरूरतमंद व्यक्ति को करना शुभ फल देता है।
पूजा विधि की बात करें तो गुरु प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक कर दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल की शुरुआत गुरु प्रदोष व्रत से होना शुभ संकेत माना जा रहा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वर्ष 2026 में भगवान शिव की कृपा से जीवन में स्थिरता, शांति और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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