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धर्म-अध्यात्म
Kedarnath-Badrinath की पौराणिक कथाओं में दर्ज धाम के अंत का रहस्य
Tara Tandi
14 Aug 2025 1:47 PM IST

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Kedarnath-Badrinath ज्योतिष न्यूज़: चारधाम की पवित्र यात्रा में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा भी शामिल है। लेकिन पुराणों में भविष्यवाणी की गई है कि एक समय ऐसा आएगा जब बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम लुप्त हो जाएँगे। इतना ही नहीं, गंगा भी शिव की जटाओं के रास्ते ब्रह्मा के कमंडल में वापस लौट जाएँगी। क्या ऐसा सचमुच होगा, कब होगा और अगर होगा तो उसके बाद क्या होगा? आइए जानते हैं।
केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड की ऊँची हिमालयी चोटियों पर स्थित हैं। जिन्हें न केवल पौराणिक बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। ऐसा माना जाता है कि चारों धामों की यात्रा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।लेकिन पुराणों में आने वाले समय में केदारनाथ और बद्रीनाथ को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली भविष्यवाणी की गई है, जिसके अनुसार ये दोनों धाम एक समय में लुप्त हो जाएँगे और आम लोगों का इन तीर्थस्थलों तक पहुँचना असंभव हो जाएगा। पुराणों में कहा गया है कि ऐसा तब होगा जब नर नारायण पर्वत आपस में मिल जाएँगे।
स्कंद पुराण के श्लोक में उल्लेख है कि-
“बहुनि सन्ति तीर्थानि दिव्य भूमि रसातले। बद्री सदृश तीर्थं न भूतो न भविष्यतिः।”
अर्थ- स्कंद पुराण के इस श्लोक के अनुसार- बद्रीनाथ के समान पवित्र तीर्थ अन्यत्र कहीं नहीं है। इसके अनुसार, कलयुग के प्रथम चरण में एक समय ऐसा आएगा जब यह तीर्थ लुप्त हो जाएगा। हालाँकि, ऐसा लगभग साढ़े पाँच हज़ार वर्षों के बाद होगा। भविष्यवाणी के बाद से अब यह अवधि पूरी हो चुकी है।
भविष्यवाणी में यह भी कहा गया है कि, इस तीर्थ के लुप्त होने से पहले कुछ संकेत भी दिखाई देंगे, जिनमें पहला संकेत यह होगा कि जोशीमठ में विराजमान भगवान नरसिंह देव के हाथ मूर्ति से अलग हो जाएँगे। मंदिर के पुजारी यह भी बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में भगवान की उंगलियाँ पतली होने लगी हैं। जब हाथ की उंगलियाँ अलग हो जाएँगी, तब बद्रीनाथ इस स्थान को छोड़ देंगे और भविष्य में केदारनाथ और बद्रीनाथ के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएँगे।
केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के लुप्त होने पर क्या होगा?
केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के लुप्त होने के बाद, भविष्य केदार और भविष्य बद्री भक्तों के लिए नए धाम होंगे। भविष्य बद्री जोशीमठ से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। जब बद्रीनाथ धाम नहीं रहेगा, तब भविष्य बद्री में नरसिंह रूप में भगवान विष्णु की पूजा की जाएगी।भविष्य केदार भी जोशीमठ क्षेत्र में स्थित है। यहाँ एक शिवलिंग और माता पार्वती की मूर्ति है। आने वाले समय में, यह एक ऐसा स्थान होगा जहाँ शिव की पूजा की जाएगी। ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने भी इसी क्षेत्र में तपस्या की थी।
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