धर्म-अध्यात्म

मंगला गौरी व्रत से मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद, जानें तिथि और पूजा के लाभ

Ratna Netam
3 Aug 2026 3:13 PM IST
मंगला गौरी व्रत से मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद, जानें तिथि और पूजा के लाभ
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धर्म : सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस पवित्र महीने में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, वहीं सावन के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती के स्वरूप मां मंगला गौरी की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मंगला गौरी व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि माता गौरी की विधि-विधान से पूजा करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

साल 2026 में सावन महीने के दौरान कुल चार मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे। ये सभी व्रत मंगलवार के दिन पड़ेंगे। पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इसके बाद दूसरा व्रत 11 अगस्त, तीसरा व्रत 18 अगस्त और चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026 को होगा। इन सभी दिनों में मां गौरी के साथ भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में जितने मंगलवार आते हैं, उतने ही मंगला गौरी व्रत रखने का विधान है। इसलिए साल 2026 में चार मंगलवार होने के कारण चार व्रत किए जाएंगे। कई परिवारों में विवाह के बाद महिलाएं लगातार पांच वर्षों तक सावन के सभी मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखती हैं। पांचवें वर्ष इसका उद्यापन किया जाता है। हालांकि श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखने का महत्व भी बताया गया है।

मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके मां गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। मां गौरी को लाल चुनरी, लाल फूल, सिंदूर, श्रृंगार की सामग्री, फल, मिठाई और सुहाग की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

पूजा के दौरान मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना शुभ माना जाता है। साथ ही "ॐ गौर्यै नमः" मंत्र का जाप करने से मां गौरी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। पूजा के अंत में माता की आरती कर परिवार की सुख-शांति, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।

मंगला गौरी व्रत की पूजा के लिए मंगलवार का दिन विशेष होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुबह सूर्योदय के बाद से दोपहर तक पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि कई स्थानों पर शाम के समय भी मां गौरी की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपने शहर के पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर पूजा कर सकते हैं।

मंगला गौरी व्रत के कई धार्मिक लाभ बताए गए हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है। दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। जिन लोगों के विवाह में परेशानियां आ रही हों, उनके लिए भी यह व्रत लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।

अगर कोई व्यक्ति सावन के सभी मंगलवार को व्रत नहीं रख सकता है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार वह श्रद्धा और नियमों के साथ एक मंगला गौरी व्रत भी रख सकता है। कहा जाता है कि भगवान और माता की पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा और भक्ति का होता है। सच्चे मन से की गई आराधना का भी शुभ फल प्राप्त होता है।

इस तरह सावन 2026 में आने वाले चारों मंगला गौरी व्रत माता पार्वती की कृपा पाने का विशेष अवसर लेकर आएंगे। श्रद्धालु विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा कर मां गौरी एवं भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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