धर्म-अध्यात्म

मैहर वाली माता की महिमा, जानिए इस भजन का भाव

nidhi
11 Oct 2026 8:18 AM IST
मैहर वाली माता की महिमा, जानिए इस भजन का भाव
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मां शारदा को घर बुलाने वाला भजन

अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी’ भजन मां शारदा के प्रति भक्तों की श्रद्धा, प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त मां भवानी से अपने घर-आंगन में पधारने, कृपा बरसाने और जीवन को सुख-शांति से भरने की प्रार्थना करता है। मध्य प्रदेश के मैहर में विराजमान मां शारदा को श्रद्धालु विद्या, बुद्धि और शक्ति की देवी के रूप में पूजते हैं।

800 शब्दों में पूरी खबर
‘अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी’ का सरल अर्थ है—हे मां शारदा भवानी, मेरे घर-आंगन में पधारिए और अपनी कृपा से मेरे जीवन को धन्य कीजिए। यह भाव भक्त और मां के बीच आत्मीय संबंध को दर्शाता है। भजन में भक्त मां को केवल मंदिर में विराजमान देवी के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार और जीवन का हिस्सा मानकर आमंत्रित करता है।
‘अंगना’ का अर्थ घर का आंगन, ‘पधारो’ का अर्थ आदरपूर्वक आने का निमंत्रण और ‘शारदा भवानी’ मां शारदा का संबोधन है। इस तरह भजन की पंक्ति में श्रद्धा, अपनापन और मां के प्रति समर्पण का भाव समाहित है। भक्त की भावना होती है कि मां उसके घर आएं, उसके दुख दूर करें और उसे सही मार्ग पर चलने की शक्ति दें।
मां शारदा को क्यों कहा जाता है विद्या की देवी?
मां शारदा को मां सरस्वती का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे ज्ञान, बुद्धि, विवेक, वाणी और विद्या की देवी हैं। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्थित मां शारदा मंदिर इसी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। विद्यार्थियों के लिए मां शारदा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। लोग पढ़ाई में सफलता, एकाग्रता और ज्ञान प्राप्त करने की कामना से माता के चरणों में शीश झुकाते हैं। वहीं, दूसरे श्रद्धालु जीवन में सुख-शांति, परिवार की खुशहाली और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मांगते हैं।
भजन में मां को घर-आंगन में बुलाने की भावना इस विश्वास को प्रकट करती है कि ज्ञान, सद्बुद्धि और सकारात्मकता से जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। मां का स्वागत करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने मन में श्रद्धा और अच्छे विचारों को स्थान देने का प्रतीक भी माना जा सकता है।
त्रिकूट पर्वत पर विराजमान हैं मैहर वाली माता
मध्य प्रदेश के मैहर में मां शारदा का प्रसिद्ध मंदिर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार, माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है और मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का रास्ता भी है। मैहर का यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। श्रद्धालु माता के दर्शन करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
मां शारदा के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। कई परिवारों में माता के भजन गाने, पूजा करने और नवरात्रि में दर्शन करने की परंपरा है। ऐसे में ‘अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी’ जैसे भजन घर-परिवार में धार्मिक वातावरण बनाने और भक्ति से जुड़ने का माध्यम बनते हैं।
मैहर वाली माता से जुड़ी क्या है मान्यता?
मैहर नाम को लेकर एक प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता प्रचलित है। मैहर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर वर्णित परंपरा के अनुसार, भगवान शिव जब माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे थे, तब उनका हार इस स्थान पर गिरा था। इसी मान्यता से ‘माई’ और ‘हार’ को जोड़कर मैहर नाम की व्याख्या की जाती है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाता है।
मैहर की लोकपरंपरा में आल्हा और उदल का नाम भी मां शारदा के भक्तों के रूप में लिया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, दोनों योद्धाओं की माता के प्रति गहरी श्रद्धा थी। मां शारदा मंदिर से जुड़ी ये कथाएं इस क्षेत्र की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नवरात्रि के अवसर पर मां के मंदिर में दर्शन और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त माता को चुनरी, नारियल और पुष्प अर्पित करके आशीर्वाद मांगते हैं। अलग-अलग परिवारों में पूजा की विधि अलग हो सकती है, लेकिन श्रद्धा और समर्पण का भाव समान रहता है।
भजन का संदेश क्या है?
‘अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी’ भजन का मूल भाव मां को अपने जीवन में आमंत्रित करना है। इसमें भक्त अपने घर को माता के स्वागत के योग्य बनाने और उनके आशीर्वाद की कामना करने की भावना व्यक्त करता है।
इस भजन को सुनते या गाते समय भक्त मां के प्रति प्रेम, विश्वास और विनम्रता का अनुभव कर सकते हैं। इसके भाव को जीवन से जोड़कर देखें तो यह ज्ञान, विवेक, शांति और सद्भावना को अपनाने की प्रेरणा देता है।
भजन यह भाव भी प्रकट करता है कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा केवल मंदिर तक सीमित नहीं रहती। पूजा-पाठ के साथ अच्छे आचरण, परिवार के प्रति प्रेम और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों में भी भक्ति की भावना दिखाई दे सकती है। इस प्रकार, ‘अंगना पधारो मोरी शारदा भवानी’ केवल माता को आमंत्रित करने वाला भजन नहीं, बल्कि भक्त के हृदय में बसे प्रेम और विश्वास की अभिव्यक्ति है। मैहर वाली माता के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और मां शारदा को ज्ञान की देवी मानने की परंपरा इस भक्ति भाव को और विशेष बनाती है।
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